अध्यात्म

Om Jai Saraswati Mata: बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की आरती और मंत्र जाप से करें विद्या व बुद्धि की पूर्ण साधना

बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। यह दिन देवी सरस्वती को समर्पित है। इस दिन विद्या और ज्ञान की देवी शारदा की पूजा करने से बुद्धि, एकाग्रता और याददाश्त बढ़ती है। इससे शिक्षा में सफलता मिलती है और रचनात्मकता और कलात्मक विकास को बढ़ावा मिलता है। बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सरस्वती का जन्म माघ महीने के शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन हुआ था। बसंत पंचमी शिक्षा, कला और संगीत के क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा सही विधि-विधान से करनी चाहिए। इसके अलावा, बसंत पंचमी की सुबह और शाम को देवी सरस्वती की आरती करें। ऐसा करने से आपको पूजा का पूरा फल मिलेगा और आपकी बुद्धि और ज्ञान भी बढ़ेगा। आरती के साथ-साथ देवी सरस्वती के मंत्रों का जाप भी करें।

मां सरस्वती के मंत्र

“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः”

“ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥”

“सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणीम्। हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु मे ॐ।”

“या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

सरस्वती माता की आरती

जय सरस्वती माता,
मैया जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता…॥
चन्द्रवदनि पद्मासिनि,
द्युति मंगलकारी ।
सोहे शुभ हंस सवारी,
अतुल तेजधारी ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

बाएं कर में वीणा,
दाएं कर माला ।
शीश मुकुट मणि सोहे,
गल मोतियन माला ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

देवी शरण जो आए,
उनका उद्धार किया ।
पैठी मंथरा दासी,
रावण संहार किया ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि,
ज्ञान प्रकाश भरो ।
मोह अज्ञान और तिमिर का,
जग से नाश करो ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

धूप दीप फल मेवा,
माँ स्वीकार करो ।
ज्ञानचक्षु दे माता,
जग निस्तार करो ॥
॥ जय सरस्वती माता…॥

माँ सरस्वती की आरती,
जो कोई जन गावे ।
हितकारी सुखकारी,
ज्ञान भक्ति पावे ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥

 

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