सांवलिया सेठ मंदिर का अनोखा “कबूतर भक्त”! कपाट खुलते ही करता है दर्शन, चरणामृत पीकर उड़ जाता है, देखें वीडियों
राजस्थान के सांवलिया सेठ मंदिर में एक कबूतर बना चर्चा का केंद्र, जो रोज कपाट खुलने का इंतजार कर दर्शन करता है और चरणामृत पीकर उड़ जाता है। जानिए पूरी अनोखी कहानी और इसके पीछे की आस्था।

मेवाड़ के प्रसिद्ध धाम में दिखा आस्था का अनोखा रूप
राजस्थान के सांवलिया सेठ मंदिर से इन दिनों एक बेहद अनोखी और हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इन सबके बीच एक कबूतर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लोग इसे “कबूतर भक्त” कह रहे हैं, जो अपनी खास दिनचर्या की वजह से चर्चा में बना हुआ है।
रोज कपाट खुलने का करता है इंतज़ार
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह कबूतर पिछले काफी समय से रोज सुबह मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही पहुंच जाता है। जिस तरह भक्त लाइन में खड़े होकर दर्शन का इंतजार करते हैं, उसी तरह यह कबूतर भी शांत बैठकर उसी पल का इंतजार करता दिखाई देता है। जैसे ही मंदिर के कपाट खुलते हैं, यह कबूतर तेजी से उड़कर सबसे पहले अंदर प्रवेश करता है—यह नजारा देखने वालों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होता।

चरणामृत ग्रहण कर करता है “प्रणाम”
मंदिर के अंदर पहुंचने के बाद यह कबूतर सीधे भगवान के चरणों में रखे चरणामृत के पास जाता है और अपनी चोंच से उसे ग्रहण करता है। कुछ पल वहीं रुककर उसकी गतिविधियां ऐसी लगती हैं, जैसे वह श्रद्धा से प्रणाम कर रहा हो। इसके बाद वह बिना किसी हलचल के उड़ जाता है, लेकिन पीछे एक ऐसा दृश्य छोड़ जाता है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है।
सांवलिया सेठ में गहरी आस्था
मेवाड़ क्षेत्र में भगवान सांवलिया सेठ के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा है। हर महीने यहां करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है और दूर-दराज से लाखों भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में सुबह की आरती से लेकर रात तक भक्तों की भीड़ बनी रहती है, जो इस धाम की लोकप्रियता और विश्वास को दर्शाता है।
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मंदिर प्रशासन ने क्या कहा?
मंदिर मंडल से जुड़े लोगों का कहना है कि भगवान की कृपा सभी पर समान होती है—चाहे वह इंसान हो या कोई जीव-जंतु। मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ-साथ पशु-पक्षियों के लिए भी दाना-पानी और देखभाल की विशेष व्यवस्था की जाती है। यह कबूतर भी उसी आस्था और विश्वास का एक अनोखा उदाहरण बन गया है।

आस्था या चमत्कार?
इस पूरे घटनाक्रम को देखने वाले श्रद्धालु इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। कुछ लोग इसे भगवान की विशेष कृपा मानते हैं, तो कुछ इसे प्रकृति और आस्था का अद्भुत मेल बताते हैं। हालांकि, यह घटना एक बात जरूर साबित करती है कि आस्था सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है—यह हर जीव में महसूस की जा सकती है।
सांवलिया सेठ मंदिर में दिखा यह “कबूतर भक्त” सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक ऐसी तस्वीर है जो विश्वास और भक्ति की नई परिभाषा पेश करती है। यह घटना लोगों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि भगवान के दरबार में हर जीव समान है।




