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यूपी वोटर लिस्ट से 1.27 करोड़ हिंदू नाम गायब? CM योगी ने जताई चिंता

यूपी वोटर लिस्ट से 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम गायब होने पर CM योगी ने चिंता जताई। जानिए SIR, चुनाव आयोग के आंकड़े और पूरी खबर।

यूपी वोटर लिस्ट से 1.27 करोड़ हिंदू नाम गायब? CM योगी ने जताई चिंता, चुनाव आयोग के आंकड़ों पर उठे सवाल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मतदाता सूची को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी वोटर लिस्ट से 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम गायब होने का दावा करते हुए चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में पात्र लोगों के नाम नहीं होना गंभीर विषय है। इस मुद्दे ने आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।

मुख्यमंत्री का यह बयान 30 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान सामने आया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर सक्रिय रहने और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए अभियान चलाने की अपील की।

CM योगी ने क्या कहा? 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम पर जताई चिंता

भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनसंख्या के अनुपात में मतदाताओं की संख्या अधिक होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा मतदाता सूची में बड़ी संख्या में लोगों के नाम शामिल नहीं हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने लगभग 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में नहीं होने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 66 लाख ऐसे लोग हैं, जिनके नाम पंचायत मतदाता सूची में दर्ज हैं, लेकिन विधानसभा की मतदाता सूची में नहीं मिल रहे हैं।

इसके अलावा, उन्होंने करीब 55 लाख सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और 18 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 4.5 लाख युवाओं के नाम मतदाता सूची में नहीं होने का मुद्दा उठाया।

मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे बूथ स्तर पर पात्र मतदाताओं की पहचान करें और उनके नाम जुड़वाने में मदद करें।

SIR क्या है और यूपी की वोटर लिस्ट में इतने बदलाव क्यों हुए?

SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की जांच और सुधार की प्रक्रिया है। इसके तहत मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए लोगों, डुप्लीकेट नामों और अन्य अपात्र प्रविष्टियों की पहचान की जाती है।

उत्तर प्रदेश में इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े बदलाव हुए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की 10 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची में लगभग 2.04 करोड़ नाम कम हुए। वहीं, अंतिम सूची में लगभग 84.28 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए।

SIR से पहले प्रदेश में करीब 15.44 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जबकि अंतिम सूची में इनकी संख्या लगभग 13.39 करोड़ रही।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि कुल हटाए गए नामों का आंकड़ा और किसी विशेष धर्म के मतदाताओं के नाम हटने का दावा अलग-अलग विषय हैं। चुनाव आयोग के सार्वजनिक आंकड़ों से 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम हटने की स्वतंत्र धर्म-आधारित पुष्टि नहीं होती।

चुनाव आयोग की भूमिका और पारदर्शिता पर सवाल

मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग की है। ऐसे में किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने की शिकायत होने पर संबंधित चुनाव अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

मतदाता सूची में बड़े बदलाव के बाद राजनीतिक दलों ने पारदर्शिता, सत्यापन और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं।

31 अक्टूबर 2026 को सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में Form 7 के बड़े पैमाने पर दाखिल किए जाने से जुड़ी शिकायतों की जांच करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश दिया। Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम हटाने के प्रस्ताव या आपत्ति के लिए किया जाता है।

इसलिए पूरे मामले में चुनाव आयोग की जांच और आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण है।

अगर वोटर लिस्ट में आपका नाम नहीं है तो क्या करें?

अगर आप उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और आपको मतदाता सूची में अपना नाम नहीं मिल रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप आधिकारिक चुनाव आयोग पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी जांच सकते हैं।

इन आसान तरीकों को अपनाएं:

  1. चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट https://voters.eci.gov.in/ पर जाएं।
  2. Search Your Name in Electoral Roll विकल्प चुनें।
  3. अपना नाम, EPIC नंबर या मांगी गई जानकारी दर्ज करें।
  4. अगर आपका नाम नहीं मिलता है, तो अपने क्षेत्र के BLO या निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) से संपर्क करें।
  5. नए मतदाता के रूप में नाम जुड़वाने के लिए Form 6 भरें।
  6. नाम हटाने या गलत तरीके से हटाए जाने से जुड़ी आपत्ति के लिए उपलब्ध आधिकारिक शिकायत और अपील प्रक्रिया का इस्तेमाल करें।

आप चुनाव आयोग की हेल्पलाइन 1950 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

लोकतंत्र में मतदाता सूची का सही होना क्यों जरूरी है?

मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए। वहीं, मृत, डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना भी निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक है।

यूपी वोटर लिस्ट से 1.27 करोड़ हिंदू नाम गायब होने के दावे ने इस विषय को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, इस दावे की धर्म के आधार पर आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना जरूरी है।

चुनाव आयोग को मतदाता सूची में हुए बदलावों का पारदर्शी विवरण उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता के मन में संदेह न रहे।

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