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लखीमपुर खीरी में सीएम योगी का बड़ा कदम, विस्थापितों और थारू जनजाति को मिला जमीन का मालिकाना हक

सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर खीरी में विस्थापित परिवारों और थारू जनजाति को भूमिधरी अधिकार पत्र देकर बड़ी राहत दी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज शनिवार को लखीमपुर खीरी के दौरे पर हैं, जहाँ वे वर्षों से अपनी जमीन के अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे बांग्लादेशी विस्थापित परिवारों को स्थायी मालिकाना हक प्रदान करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री 331 विस्थापित हिंदू परिवारों को भूमिधरी अधिकार पत्र वितरित करेंगे। विभाजन के समय पाकिस्तान और फिर बांग्लादेश से विस्थापित होकर आए ये परिवार पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर जैसे जिलों में बसे थे, जिन्हें अब राज्य सरकार मुख्यधारा से जोड़ते हुए पक्की जमीन का मालिक बना रही है।

थारू जनजाति का सशक्तिकरण और आवास की चाबियां

विस्थापित परिवारों के साथ-साथ मुख्यमंत्री पलिया क्षेत्र के चंदन चौकी में थारू जनजाति के 4556 परिवारों को भी भौमिक अधिकार पत्र सौंपेंगे। यह पहल जनजातीय समुदायों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है। इसके साथ ही ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ के अंतर्गत उन लाभार्थियों को उनके पक्के घरों की चाबियां सौंपी जाएंगी, जिनका अपना घर होने का सपना अब साकार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्वयं सोशल मीडिया पर साझा किया कि यह कार्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सम्मान और सुविधा पहुँचाने के सरकारी संकल्प का जीवंत उदाहरण है।

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अरबों रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात

मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल अधिकार पत्र वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जिले के सर्वांगीण विकास के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाओं का उपहार भी देंगे। धौरहरा और मोहम्मदी क्षेत्रों में लगभग 417 करोड़ रुपये की लागत वाली 213 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जाएगा। वहीं पलिया, श्रीनगर, निघासन और गोला क्षेत्रों के लिए करीब 817 करोड़ रुपये की 314 अन्य विकास परियोजनाओं की शुरुआत होगी। इन परियोजनाओं में सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर रोजगार और सुविधाओं में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है।

कानूनी संशोधन और पात्रता के कड़े नियम

राज्य सरकार ने इस ऐतिहासिक निर्णय को लागू करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2026’ को मंजूरी दी है, जिसके तहत पात्र परिवारों को एक एकड़ तक की जमीन पर मालिकाना हक दिया जा रहा है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने स्पष्ट किया कि मालिकाना हक केवल उन्हीं जमीनों पर मिलेगा जो सीलिंग सीमा के अंदर हैं और सार्वजनिक उपयोग जैसे कि खलिहान, चरागाह या तालाब की श्रेणी में नहीं आती हैं। यह लाभ नागरिकता अधिनियम, 2019 के तहत भारतीय नागरिकता के योग्य लोगों को मिल रहा है हैं, जिससे सीमावर्ती जिलों में बसे हजारों परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो गया है।

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