रूस में जबरन सेना में भर्ती बना मौत का कारण: रामपुर के शावेज़ की गोली लगने से मौत, दिल्ली पहुंचा शव
रामपुर के 22 वर्षीय युवक शावेज़ की रूस-यूक्रेन युद्ध में गोली लगने से मौत हो गई। नौकरी के लिए रूस गए युवक को जबरन सेना में भर्ती किया गया था, शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा।

रामपुर (उत्तर प्रदेश): बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में रूस गए 22 वर्षीय युवक शावेज़ की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि शावेज़ को रूस की सेना में जबरन भर्ती कर लिया गया था, जहां युद्ध के दौरान गोली लगने से उसकी जान चली गई। शनिवार सुबह उसकी डेड बॉडी रूस से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंची, जिसके बाद परिवार में मातम छा गया।
नौकरी की तलाश में गया था रूस
परिजनों के अनुसार, शावेज़ करीब 9 महीने पहले रूस गया था, जहां वह स्टील फर्नीचर का काम करता था। परिवार को उम्मीद थी कि वह विदेश में काम करके घर की आर्थिक स्थिति सुधारेगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
2 महीने बाद ही सेना में कर लिया गया शामिल
बताया जा रहा है कि रूस पहुंचने के कुछ समय बाद ही, करीब 2 महीने के भीतर उसे सेना में शामिल कर लिया गया। परिजनों का आरोप है कि यह भर्ती उसकी मर्जी के खिलाफ हुई और उसे सीधे युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां भारतीय युवाओं को नौकरी का झांसा देकर रूस बुलाया गया और फिर उन्हें सेना में भर्ती कर दिया गया।
गोली लगने से हुई मौत
सूत्रों के मुताबिक, युद्ध के दौरान शावेज़ को गोली लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। रूस-यूक्रेन युद्ध में लगातार विदेशी नागरिकों की भी जान जा रही है और कई भारतीय युवक भी इसका शिकार बने हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रूस की सेना में शामिल 26 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अब भी लापता हैं।
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दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा पार्थिव शरीर
आज सुबह शावेज़ का पार्थिव शरीर दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बढ़ता जा रहा है ऐसा खतरा
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस में सेना की कमी को पूरा करने के लिए विदेशी युवाओं को भी लुभाकर या दबाव में भर्ती किया जा रहा है।
सरकार से उठी कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस मामले की जांच की जाए। ऐसे एजेंट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही विदेशों में फंसे भारतीय युवाओं को सुरक्षित वापस लाया जाए।
रामपुर के शावेज़ की मौत सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि एक बड़ा सवाल है—क्या विदेश में नौकरी का सपना अब युवाओं के लिए खतरा बनता जा रहा है? यह घटना सरकार और समाज दोनों के लिए चेतावनी है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाए, ताकि भविष्य में किसी और घर का चिराग न बुझे।




