
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस पावन अवसर को कृष्ण जन्माष्टमी या जन्मोत्सव के रूप में देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। वर्ष 2025 में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त (शनिवार) को मनाया जाएगा। भक्त इस दिन उपवास रखते हैं, व्रत, भजन-कीर्तन और रात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। लेकिन श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए पूजा के दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना ज़रूरी होता है।
व्रत और पूजा विधि:
1. व्रत संकल्प लें: जन्माष्टमी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
2. पूजा स्थल तैयार करें: घर के मंदिर या स्वच्छ स्थान पर एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर श्रीकृष्ण की मूर्ति या बाल गोपाल की तस्वीर स्थापित करें।
3. अभिषेक करें: बाल गोपाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराएं। इसके बाद साफ जल से धोकर वस्त्र पहनाएं और श्रंगार करें।
4. आरती और भजन: भगवान की पूजा में तुलसी, माखन-मिश्री, फूल, धूप-दीप, फल, और पंजीरी अर्पित करें। फिर आरती करें और भजन-कीर्तन करें।
5. मध्यरात्रि पूजन: श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि को माना जाता है, इसलिए ठीक 12 बजे जन्मोत्सव मनाएं। झूला झुलाएं और ‘नंद के आनंद भयो’ जैसे भजन गायें।
क्या न करें:
• व्रत के दौरान अनाज या तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) का सेवन न करें।
• क्रोध, झूठ और कटु वाणी से बचें।
• जन्माष्टमी की पूजा से पहले नाखून काटना या बाल कटवाना उचित नहीं माना जाता।
• पूजा के समय मोबाइल या टीवी जैसे उपकरणों का प्रयोग न करें, इससे एकाग्रता भंग होती है।
क्या करें:
• उपवास रखें और फलाहार का सेवन करें।
• दिनभर श्रीकृष्ण के भजन सुनें या नाम जप करें।
• जरूरतमंदों को दान-पुण्य करें।
• बच्चों को श्रीकृष्ण की लीलाओं की कहानियां सुनाएं।
श्रीकृष्ण की कृपा पाने का सरल मार्ग:
कहा जाता है कि यदि जन्माष्टमी के दिन सच्चे मन से व्रत रखा जाए और नियमों का पालन करते हुए श्रीकृष्ण की भक्ति की जाए, तो भगवान प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं। जीवन में प्रेम, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।




