ग्रीन हाइड्रोजन हब बनेगा यूपी: योगी सरकार की बड़ी पहल, ₹50 करोड़ के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और स्टार्टअप्स को सपोर्ट
योगी सरकार उत्तर प्रदेश को 'ग्रीन एनर्जी' टेक्नोलॉजी का हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है। 'यूपी ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी-2024' के तहत रिसर्च और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक प्लान तैयार किया गया है। इसमें दो अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना शामिल है, जिन्हें सरकार से ₹50 करोड़ तक की फंडिंग मिलेगी। ग्रीन हाइड्रोजन स्टार्टअप को पांच साल के लिए सालाना ₹25 लाख की फंडिंग मिलेगी। यह पहल नेट-जीरो लक्ष्यों को हासिल करने और हजारों 'ग्रीन जॉब्स' पैदा करने में योगदान देगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, उत्तर प्रदेश अब सिर्फ़ ऊर्जा का उपभोग करने वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि अब ‘ग्रीन एनर्जी’ टेक्नोलॉजी में अग्रणी बनने के लिए तैयार है। ‘उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी-2024’ के तहत, राज्य सरकार ने रिसर्च और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की है। इस रणनीति के तहत, राज्य में दो अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित किए जाएंगे, और ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए युवा इनोवेटर्स को पांच साल के लिए सालाना वित्तीय सहायता मिलेगी।
स्वदेशी टेक्नोलॉजी और ₹50 करोड़ का रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर
सरकार का मुख्य फोकस ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और स्टोरेज की लागत को कम करने पर है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: देश भर के प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से दो CoE स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक सेंटर को ₹50 करोड़ तक की 100% सरकारी फंडिंग मिलेगी।
रिसर्च का दायरा: यहां हाई-एंड लैब विकसित की जाएंगी, जो ग्रीन हाइड्रोजन के ट्रांसपोर्टेशन, सुरक्षित स्टोरेज और कुशल उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेंगी। ये सेंटर सीधे इंडस्ट्री की ज़रूरतों के हिसाब से स्वदेशी समाधान विकसित करेंगे।
स्टार्टअप को 5 साल के लिए ₹25 लाख की सालाना मदद मिलेगी
इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए, योगी सरकार ने युवा उद्यमियों के लिए अपने खजाने खोल दिए हैं।
सालाना फंडिंग: मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर से जुड़े ग्रीन हाइड्रोजन स्टार्टअप को पांच साल के लिए सालाना ₹25 लाख की वित्तीय सहायता मिलेगी।
उद्देश्य: इसका उद्देश्य रिसर्च-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है ताकि युवा वैज्ञानिक भविष्य की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए नए और किफायती स्टार्टअप स्थापित कर सकें। नेट ज़ीरो लक्ष्य और ‘ग्रीन जॉब्स’ का निर्माण
उत्तर प्रदेश 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
गोरखपुर प्लांट का उदाहरण: राज्य का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट गोरखपुर में पहले ही शुरू हो चुका है, जिससे सालाना 500 टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
राष्ट्रीय मिशन को आगे बढ़ाना: सरकार की यह पहल न केवल राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को गति देगी, बल्कि राज्य में हजारों नई ‘ग्रीन जॉब्स’ भी पैदा करेगी।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन उत्तर प्रदेश को देश में ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी लीडर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। रिसर्च और स्टार्टअप के ज़रिए, राज्य न केवल अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को स्थायी रूप से पूरा करेगा, बल्कि दूसरे राज्यों और देशों को भी सस्ती टेक्नोलॉजी दे पाएगा।




