
अमेरिका और रूस के बीच रिश्तों में एक बार फिर हलचल देखने को मिली जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिका दौरे पर पहुंचे और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वाशिंगटन डी.सी. में मुलाकात की। लेकिन इस दौरे में सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब ट्रंप से मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद पुतिन अचानक अलास्का के एक पुराने सैन्य कब्रिस्तान पहुंच गए। उनके इस अनपेक्षित दौरे ने न केवल मीडिया बल्कि अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है।
बताया जा रहा है कि पुतिन ने अलास्का के ऐतिहासिक “Fort Richardson National Cemetery” का दौरा किया, जहां कई रूसी मूल के सैनिकों और युद्ध के दौरान मारे गए लोगों की कब्रें हैं। पुतिन ने वहां फूल चढ़ाए और कुछ देर तक मौन भी रखा। उनके साथ रूसी राजनयिकों की एक छोटी सी टीम मौजूद थी, लेकिन मीडिया को पहले से इस दौरे की कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
इस दौरे के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का यह कदम एक प्रतीकात्मक संदेश है, जो अमेरिका और रूस के बीच इतिहास, युद्ध और भू-राजनीति को दर्शाता है। अलास्का, जो एक समय में रूसी साम्राज्य का हिस्सा था और 1867 में अमेरिका ने रूस से खरीदा था, लंबे समय से एक प्रतीकात्मक स्थान रहा है। पुतिन का वहां जाना इसी ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात भी खासा चर्चा में रही। इस बैठक में दोनों नेताओं ने वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, और यूक्रेन संकट जैसे मुद्दों पर चर्चा की। हालांकि इस मुलाकात की कोई औपचारिक घोषणा पहले नहीं की गई थी, लेकिन इसे ‘अनौपचारिक’ और ‘गोपनीय’ बैठक के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि ट्रंप, जो आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में एक बार फिर मैदान में हैं, रूस के साथ अपने संबंधों को फिर से मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
पुतिन का अलास्का में कब्रिस्तान दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और रूस के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं, खासकर यूक्रेन युद्ध और नाटो की भूमिका को लेकर। ऐसे में यह दौरा न सिर्फ एक व्यक्तिगत श्रद्धांजलि का संकेत हो सकता है, बल्कि एक कूटनीतिक संदेश भी।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से अभी तक इस दौरे को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
पुतिन का यह अनपेक्षित और प्रतीकात्मक कदम आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।




