1 अप्रैल से बढ़ेंगे सभी दवाइयों के दाम! जानें आम जनता पर क्या होगा असर?
1 अप्रैल 2026 से देश में 1000 से ज्यादा जरूरी दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने जा रही है। सरकार ने WPI के आधार पर करीब 0.6% तक दाम बढ़ाने की मंजूरी दी है।

अगर आप नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करते हैं, तो आपकी जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। बता दें कि 1 अप्रैल 2026 से देश में 1000 से ज्यादा जरूरी दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने जा रही है। सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में हुए बदलाव के आधार पर दवाओं के दाम बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने जानकारी दी है कि साल 2025 में थोक महंगाई दर में 0.64956 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी के आधार पर जरूरी दवाओं (NLEM सूची) की कीमतों में लगभग 0.6% का इजाफा किया जा रहा है। यह एक नियमित प्रक्रिया है, जो हर साल महंगाई के साथ तालमेल बिठाने के लिए की जाती है।
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कौन सी दवाएं होंगी प्रभावित?
इस बढ़ोतरी का सीधा असर उन दवाओं पर पड़ेगा, जो आम आदमी के रोजमर्रा के इलाज में काम आती हैं। इसमें सबसे पहला नाम पैरासिटामॉल का है, जिसका इस्तेमाल बुखार और शरीर दर्द के लिए हर घर में किया जाता है। इसके साथ ही बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज में काम आने वाली जरूरी एंटीबायोटिक दवाएं, जैसे एजिथ्रोमाइसिन और सिप्रोफ्लॉक्सासिन, भी महंगी हो जाएंगी।
केवल यही नहीं, एनीमिया (खून की कमी) के उपचार, शरीर के लिए जरूरी विटामिन, मिनरल्स और विभिन्न स्टेरॉयड्स की कीमतों में भी इजाफा होगा। गंभीर बीमारियों के मामले में, हार्ट पेशेंट्स के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘बेयर मेटल स्टेंट’ और ‘ड्रग एल्युटिंग स्टेंट’ (DES) की दरें भी इस सूची के अनुसार तय की गई हैं, जिससे हृदय रोगों का इलाज भी पहले के मुकाबले थोड़ा महंगा हो जाएगा।
कंपनियों की मांग और लागत का संकट
दवा कंपनियों का कहना है कि सरकार द्वारा दी गई 0.6% की बढ़ोतरी बहुत कम है। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण दवाओं में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल (API) 30 से 35 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक और एल्युमिनियम 40% तक महंगा हुआ है। साथ ही, सिरप में इस्तेमाल होने वाला ग्लिसरीन 64% महंगा हो गया है। कंपनियों के मुताबिक, लागत इतनी बढ़ गई है कि उन्हें इस मामूली बढ़ोतरी से ज्यादा राहत नहीं मिलेगी।
आम जनता पर क्या होगा असर?
हालांकि आधिकारिक तौर पर बढ़ोतरी 1 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन हजारों दवाओं के दाम एक साथ बढ़ने से मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में कुछ दवाओं के दाम कच्चे माल की कमी की वजह से और ज्यादा भी बढ़ सकते हैं।




