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हॉर्मुज खुला पर राहत नहीं: समुद्र में बिछी हैं ‘मौत की खदानें’, ईरान ने रातों-रात बदले जहाजों के रास्ते

हॉर्मुज खुला पर राहत नहीं

Strait of Hormuz Navigation Advisory: ईरान ने हाल ही में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए एक नई नेविगेशन सलाह जारी की है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और समुद्री सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि समुद्री रास्तों में बदलाव करना अब अनिवार्य हो गया है क्योंकि समुद्र के भीतर बिछाई गई खदानें जहाजों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती हैं। इस नई सलाह का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता प्रदान करना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों के बाद दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी है, जिससे इस जलमार्ग को अस्थायी रूप से फिर से खोलने का रास्ता साफ हुआ है।
समुद्री खदानों का बढ़ता खतरा और नए रास्तों का निर्धारण

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ संवेदनशील हिस्सों में समुद्री खदानों की मौजूदगी का संदेह है। स्थानीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के मुताबिक, इन खतरनाक क्षेत्रों से बचने के लिए जहाजों को अब उन रास्तों का पालन करना होगा जो ईरान द्वारा निर्धारित किए गए हैं। ईरानी नौसेना ने सुरक्षा के लिहाज से समुद्री यातायात के मार्गों को संशोधित किया है ताकि व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों के साथ किसी भी प्रकार का हादसा न हो। यह निर्देश सभी देशों के जहाजों के लिए समान रूप से लागू किए गए हैं और ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि कोई जहाज इन नियमों की अनदेखी करता है, तो उसे गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
जहाजों के आवागमन के लिए नौसेना के कड़े निर्देश

ईरान की सरकारी मीडिया और अल जजीरा की रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने जहाजों से अपील की है कि वे जलडमरूमध्य को पार करते समय उनकी सेना के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें। नई व्यवस्था के तहत जहाजों के आने और जाने के लिए अलग-अलग गलियारे तय किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, जो जहाज ओमान सागर की तरफ से फारस की खाड़ी में प्रवेश करना चाहते हैं, उन्हें अब लारक द्वीप के उत्तरी हिस्से से होकर गुजरना होगा। इसके विपरीत, जो जहाज फारस की खाड़ी से बाहर निकलकर ओमान सागर की ओर जा रहे हैं, उन्हें लारक द्वीप के दक्षिणी हिस्से का उपयोग करने की सलाह दी गई है। यह विभाजन इसलिए किया गया है ताकि जहाजों के बीच टक्कर को रोका जा सके और खदानों वाले संभावित इलाकों से दूरी बनाई जा सके।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और दो सप्ताह का महत्वपूर्ण युद्धविराम

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का समझौता होना एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। इस समझौते को सफल बनाने में पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि यह अस्थायी शांति इस शर्त पर आधारित है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति शुरू करेगा। यह जलमार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है क्योंकि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। लगभग छह सप्ताह तक चले भीषण संघर्ष और अनिश्चितता के बाद, यह युद्धविराम क्षेत्र में शांति बहाली की एक किरण बनकर उभरा है।

ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि शुक्रवार तक इस जलमार्ग को आंशिक रूप से खोला जा सकता है, लेकिन इस बार पूरी प्रक्रिया ईरान की कड़ी निगरानी में होगी। इस बीच, एक नई बहस ने भी जन्म ले लिया है। ईरान का प्रस्ताव है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर एक विशेष शुल्क या टोल टैक्स लगाया जाना चाहिए। ईरान इसे लंबे समय तक शांति बनाए रखने और सुरक्षा प्रदान करने के बदले लिए जाने वाले मुआवजे के रूप में देख रहा है। हालांकि, इस विचार का कड़ा विरोध भी शुरू हो गया है। ओमान ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है और कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर इस तरह का शुल्क वसूलना मौजूदा समुद्री कानूनों और अंतरराष्ट्रीय संधियों का स्पष्ट उल्लंघन होगा। कुछ रिपोर्टों में तो यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने शुल्क लेना शुरू भी कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और अमेरिका का रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वाशिंगटन भी एक ऐसी संयुक्त व्यवस्था पर विचार कर रहा है जिसके तहत सुरक्षा के नाम पर शुल्क लगाया जा सके। यह पूरी स्थिति काफी जटिल होती जा रही है क्योंकि एक तरफ सुरक्षा का सवाल है तो दूसरी तरफ वैश्विक व्यापार की लागत बढ़ने का डर। होर्मुज जलडमरूमध्य मात्र 34 किलोमीटर चौड़ा एक समुद्री रास्ता है जो ईरान और ओमान के बीच स्थित है। यदि यहाँ आवाजाही में कोई भी बाधा आती है या अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो इसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह दो सप्ताह का युद्धविराम आगे चलकर किसी स्थायी शांति समझौते में बदल पाता है या नहीं।

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