दिल्ली रिज मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- हरियाली पर बदलनी होगी सोच
दिल्ली रिज मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल राजधानी दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए हरियाली जरूरी है। During the hearing of the Delhi Ridge case, the Supreme Court observed that greenery is essential not only for the capital, Delhi, but for the entire country.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली रिज क्षेत्र से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि अब यह मानसिकता बदलने का समय आ गया है कि केवल देश की राजधानी दिल्ली को ही हरियाली की जरूरत है, जबकि बाकी राज्यों की इसमें कम भूमिका है।
हरियाली पर ‘समग्र दृष्टिकोण’ जरूरी
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि पर्यावरण के मुद्दे पर किसी एक शहर तक सीमित रहने के बजाय पूरे देश के लिए समग्र (होलिस्टिक) दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
अदालत ने सवाल उठाया कि यदि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) पूरे देश में हरियाली से जुड़े मामलों को देख सकती है, तो दिल्ली के लिए अलग से विशेष व्यवस्था क्यों होनी चाहिए? साथ ही कोर्ट ने पूछा कि क्या दिल्ली में ऐसा कुछ अलग है जो इसे अन्य शहरों से विशेष बनाता है।
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रिज मैनेजमेंट बोर्ड को वैधानिक दर्जा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (DRMB) को वैधानिक दर्जा देने का निर्देश दिया गया था। इसका उद्देश्य इसे ‘सिंगल विंडो अथॉरिटी’ बनाना है, ताकि रिज क्षेत्र से जुड़े सभी फैसले एक ही जगह से लिए जा सकें।
क्या है दिल्ली रिज?
दिल्ली रिज अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। यह राजधानी में करीब 7,784 हेक्टेयर में फैला एक पहाड़ी और वन क्षेत्र है। प्रशासनिक सुविधा के लिए इसे चार हिस्सों दक्षिण रिज, दक्षिण-मध्य रिज, मध्य रिज और उत्तर रिज में बांटा गया है।




