
CP Radhakrishnan Oath: सीपी राधाकृष्णन नवनिर्वाचित भारत के 15वें उपराष्ट्रपति हैं। वह आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शपथ लेंगे।
देश के नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शुक्रवार (12 सितंबर, 2025) को शपथ लिए है। यह शपथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें सुबह 10 बजे राष्ट्रपति भवन में दिलाई। राधाकृष्णन ने मंगलवार (9 सितंबर) को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में बी सुदर्शन रेड्डी को हराकर जीत हासिल की।
15वें उपराष्ट्रपति बने सीपी राधाकृष्णन
सीपी राधाकृष्णन आधिकारिक रूप से भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बन गए हैं। उन्होंने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, वैकेंया नायडू और हामिद अंसारी भी उपस्थित रहे। इस ऐतिहासिक पल ने देश में राजनीतिक स्थिरता और नए नेतृत्व की दिशा को दर्शाया।
उपराष्ट्रपति चुनाव में राधाकृष्णन ने संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के बड़े अंतर से हराया था। उन्हें कुल 452 वोट मिले, जबकि सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कुल 788 मतदाता थे, जिसमें से 7 पद रिक्त रहने के कारण 781 प्रभावी वोटर बने। मतदान प्रक्रिया में 768 सांसदों ने हिस्सा लिया, जबकि 13 सदस्य अनुपस्थित रहे।इस जीत के साथ सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति पद पर कब्जा जमाते हुए देश के संवैधानिक नेतृत्व में एक नई दिशा की शुरुआत की है।
सीपी राधाकृष्णन
सीपी राधाकृष्णन की उपराष्ट्रपति बनने की यात्रा बेहद प्रेरणादायक रही है। उनका राजनीतिक सफर छात्र आंदोलन से शुरू हुआ और बाद में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सक्रिय सदस्य बनें। उन्होंने बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में लंबा समय बिताया और 2004 से 2007 तक तमिलनाडु बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 2007 में उन्होंने एक ऐतिहासिक रथ यात्रा की, जिसमें उन्होंने मात्र 93 दिनों में कुल 19,000 किलोमीटर की दूरी तय की। इस यात्रा का उद्देश्य देश की नदियों को जोड़ने, आतंकवाद का मुकाबला करने, समान नागरिक संहिता को लागू करने, अस्पृश्यता को खत्म करने और नशा मुक्ति पर जोर देने का था।इसके बाद, 2020 से 2022 तक सीपी राधाकृष्णन केरल बीजेपी के प्रभारी भी रहे, जहाँ उन्होंने संगठन को मजबूत करने और पार्टी की पकड़ को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका समर्पित और संघर्षमय राजनीतिक सफर उन्हें आज उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचाने में सहायक रहा।

