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यूपी पुलिस का झंडा दिवस: एक झंडा… जो सिर्फ पहचान नहीं, बलिदान की कहानी भी है

आज पूरे प्रदेश में यूपी पुलिस का झंडा दिवस धूमधाम से मनाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को डीजीपी राजीव कृष्ण ने झंडा दिवस का विशेष चिन्ह लगाकर सम्मानित किया। लेकिन इस झंडे की कहानी क्या है? क्यों मनाया जाता है यह दिन? और यूपी पुलिस के लिए यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

 आज उत्तर प्रदेश में यूपी पुलिस का झंडा दिवस पूरे सम्मान और औपचारिकता के साथ मनाया गया।
राजधानी लखनऊ के पुलिस मुख्यालय में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में डीजीपी राजीव कृष्ण ने सीएम योगी आदित्यनाथ को झंडा दिवस का विशेष चिन्ह लगाकर उनका सम्मान किया।
यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यूपी पुलिस की परंपरा और गौरव का प्रतीक है। लेकिन झंडा दिवस मनाया क्यों जाता है?
और इसकी शुरुआत कब हुई? आइए पूरी कहानी समझते हैं—

झंडा दिवस की कहानी: 1952 की वह यादगार घड़ी

1952 साल था।देश आज़ादी के बाद नई व्यवस्था में खुद को ढाल रहा था।इसी दौरान, उत्तर प्रदेश पुलिस और PAC की बहादुरी को देखकर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें एक विशेष झंडा प्रदान किया। यह सिर्फ कपड़े का टुकड़ा नहीं था, यह एक सम्मान था— एक ऐसा सम्मान जो याद दिलाता है कि कर्तव्य से बढ़कर कुछ नहीं।

“23 नवंबर 1952 को सौंपा गया यह झंडा आज भी हर पुलिसकर्मी के दिल में गर्व की लौ जलाए रखता है।”

झंडा दिवस क्यों मनाया जाता है?

1. पुलिस बल की उपलब्धियों का सम्मान

यूपी पुलिस देश का सबसे बड़ा पुलिस बल है। झंडा दिवस उनके समर्पण, वीरता और त्याग को याद करने के लिए मनाया जाता है।

2. शौर्य और परंपरा का प्रतीक

यह झंडा पुलिस बल की ऐतिहासिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। यह बताता है कि पुलिस सिर्फ कानून नहीं लागू करती, बल्कि समाज की सुरक्षा में निरंतर युद्धरत रहती है।

3. कर्तव्य के प्रति प्रेरणा

झंडा दिवस जवानों के मन में गर्व पैदा करता है। यह उन्हें अपनी ड्यूटी को सम्मान और निष्ठा के साथ निभाने की प्रेरणा देता है।

4. सरकार और पुलिस के बीच सम्मानजनक संबंध

इस अवसर पर मुख्यमंत्री, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारी झंडा दिवस का प्रतीक धारण करते हैं, जिससे पुलिस बल का मनोबल बढ़ता है और उन्हें सम्मान मिलता है।

झंडा दिवस चिन्ह का असली मतलब क्या है?

जब आज डीजीपी राजीव कृष्ण ने सीएम योगी आदित्यनाथ को झंडा दिवस चिन्ह लगाया, यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी।
यह संकेत था कि—

राज्य सरकार और पुलिस बल एक-दूसरे के साथ खड़े हैं।
यह चिन्ह साहस, अनुशासन, निष्ठा और सेवा का प्रतीक है।

इस छोटे-से प्रतीक में एक पूरा इतिहास छिपा हुआ है—
शौर्य गाथाएँ, ऑपरेशन की यादें, मानव सेवा की अनगिनत कहानियाँ।

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🔵 आज झंडा दिवस पर क्या हुआ?

 

  •  डीजीपी ने सीएम योगी को झंडा दिवस चिन्ह लगाया

मुख्य समारोह में डीजीपी राजीव कृष्ण ने स्वयं सीएम योगी आदित्यनाथ की वर्दी पर यूपी पुलिस झंडा दिवस का विशेष प्रतीक चिन्ह लगाया।
यह सम्मान इस बात का प्रतीक था कि पुलिस बल और सरकार एक साथ मिलकर राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

  •  सीएम योगी ने पुलिस बल की प्रशंसा की

सीएम योगी ने यूपी पुलिस को “देश की सबसे अनुशासित और तेज़ी से आधुनिक हो रही फोर्स” बताते हुए उनकी सराहना की।
उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने में पुलिस की भूमिका बेहद अहम है।

  •  नवाचार और तकनीकी सुधारों पर जोर

कार्यक्रम में सीएम ने पुलिस को नई तकनीक, डिजिटल मॉनिटरिंग और आधुनिक उपकरणों के उपयोग पर और अधिक तेजी से काम करने की बात कही।

  •   शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई

कार्यक्रम के दौरान शहीद जवानों को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया।
सीएम ने उनके परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

  •  परेड और सम्मान समारोह

समारोह में जवानों ने परेड के माध्यम से झंडा दिवस को सलामी दी।
कई पुलिसकर्मियों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया।

उस पल में सिर्फ चिन्ह नहीं लगाया गया—
उस पल में एक संदेश दिया गया:

“हम सब पुलिस बल के साथ खड़े हैं—हर मिशन में, हर मुश्किल में।”

और उसी क्षण, हवा में लहरा रहा झंडा जैसे कह रहा था—
“मैं गवाह हूँ तुम्हारी वीरता का…”

अंत में… यह सिर्फ झंडा नहीं

यह झंडा उन 24 घंटे में जागने वाली आँखों का अभिमान है।
यह झंडा उस वर्दी की आवाज़ है, जो कहती है—

“जहाँ भी बुराई उठेगी, हम खड़े होंगे।
चाहे रात हो या तूफान, हम ड्यूटी पर रहेंगे।”

यूपी पुलिस का झंडा दिवस सिर्फ एक दिन नहीं—
यह उन सभी अदृश्य हाथों को सलाम है, जो हमें सुरक्षित रखते हैं।

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