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'वायरल गर्ल' मोनालिसा भोंसले निकली नाबालिग, पति फरमान खान पर POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज

महाकुंभ की ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा भोंसले के नाबालिग होने का खुलासा होने के बाद मामले ने कानूनी मोड़ ले लिया है।

सोशल मीडिया पर ‘महाकुंभ वायरल गर्ल’ के रूप में सुर्खियां बटोरने वाली मोनालिसा भोंसले और फरमान खान के निकाह के मामले ने अब एक बेहद गंभीर और कानूनी मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की गहन जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि जिस लड़की को बालिग बताकर विवाह कराया गया था, वह वास्तव में एक नाबालिग है। इस खुलासे के बाद मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर थाने में आरोपी फरमान खान के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट, भारतीय न्याय संहिता और एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

जांच में कैसे खुला झूठ का जाल?

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर एक विशेष जांच दल ने मध्य प्रदेश से लेकर केरल तक दस्तावेजों की पड़ताल की। हालांकि, विवाह के समय पेश किए गए आधार कार्ड और नगरपालिका के दस्तावेजों में मोनालिसा को बालिग दिखाया गया था, लेकिन महेश्वर के सरकारी अस्पताल के जन्म रिकॉर्ड ने पूरी सच्चाई सामने रख दी। अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। इसका सीधा अर्थ यह है कि 11 मार्च 2026 को हुए निकाह के समय उसकी उम्र महज 16 साल 2 महीने थी। जांच दल ने पाया कि षड्यंत्र के तहत नगरपालिका से गलत जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया था, जिसे अब निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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केरल से मध्य प्रदेश तक फैला साजिश का जाल

अधिवक्ता प्रथम दुबे द्वारा आयोग के समक्ष रखे गए तथ्यों में इस विवाह के पीछे एक बड़ी संगठित साजिश का अंदेशा जताया गया है। जांच रिपोर्ट में संकेत दिए गए हैं कि इस विवाह को सफल बनाने और इसे कानूनी रूप देने में केरल के कुछ राजनीतिक नेताओं और प्रतिबंधित संगठनों (PFI) की संलिप्तता हो सकती है। आरोप लगाया गया है कि एक खास ‘नैरेटिव’ सेट करने के लिए पारधी जनजाति की इस नाबालिग बेटी का मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया गया। केरल के नयनार देवा मंदिर में हुई शादी और वहां की ग्राम पंचायत में हुए पंजीकरण को भी अब संदेह के घेरे में रखा गया है, क्योंकि वहां उम्र के सत्यापन में बड़ी लापरवाही बरती गई।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस मामले को जनजाति समुदाय की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा बताते हुए कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को केरल और मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को दिल्ली स्थित मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही, दोनों राज्यों की पुलिस से तीन दिनों के भीतर इस केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग का फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विवाह कराना एक जघन्य अपराध है और इसमें शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल, इस रिपोर्ट के बाद पूरे प्रदेश में हलचल तेज हो गई है और पुलिस फरमान खान की गिरफ्तारी की तैयारी में जुटी है।

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