क्या दिल्ली बनेगी इंद्रप्रस्थ? राजधानी का नाम बदलने के प्रस्ताव पर शुरू हुई राजनीतिक जंग
Delhi Rename News: दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग तेज। बीजेपी सांसद ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा, मुद्दे पर सियासी बहस छिड़ी। जानें पूरा मामला। Delhi Rename News: Demands to change Delhi's name to "Indraprastha" are gaining momentum. A BJP MP has written to Home Minister Amit Shah, sparking a political debate on the issue. Learn the full story.

दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग तेज, राजनीति गलियारों में छिड़ी नई बहस
Delhi Rename News 2026: देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) का नाम बदलने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल (Praveen Khandelwal) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) को पत्र लिखकर दिल्ली का नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ रखने का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव के सामने आते ही राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है।
क्यों उठी नाम बदलने की मांग?
मांग करने वाले नेताओं का कहना है कि ‘इंद्रप्रस्थ’ का उल्लेख महाभारत काल में मिलता है और इसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा जाता है। उनका तर्क है कि राजधानी का नाम भारतीय परंपरा और प्राचीन इतिहास से प्रेरित होना चाहिए। समर्थकों का कहना है कि नाम परिवर्तन से देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी और नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जुड़ने का अवसर भी प्राप्त होगा।
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विपक्ष ने उठाए सवाल
हालांकि, इस प्रस्ताव पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नाम बदलना प्राथमिक मुद्दा नहीं है, बल्कि राजधानी में प्रदूषण, ट्रैफिक, पानी और रोजगार जैसी समस्याओं पर ध्यान देने की ज्यादा जरूरत है। विपक्ष का तर्क है कि नाम परिवर्तन से प्रशासनिक खर्च भी बढ़ेगा, क्योंकि सरकारी दस्तावेजों, बोर्ड, साइनज और आधिकारिक रिकॉर्ड में भी बदलाव करना पड़ेगा।
पहले भी बदले जा चुके हैं शहरों के नाम
भारत में कई शहरों के नाम पहले भी बदले जा चुके हैं। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज, फैजाबाद का नाम अयोध्या और औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर किया जा चुका है। ऐसे में दिल्ली के नाम परिवर्तन का मुद्दा भी ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है आगे की प्रक्रिया?
यदि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर विचार करती है, तो इसके लिए संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया अपनानी होगी। राज्य सरकार की सिफारिश, केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ेगा। फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है।




