Qatar Gas Crisis: कतर LNG संकट: भारत की गैस सप्लाई पर बड़ा खतरा, 5 साल तक रह सकती है टेंशन
कतर के रास लफान पर हमले के बाद LNG सप्लाई प्रभावित। जानें भारत की LNG निर्भरता, कीमतों पर असर और आने वाले 5 साल का संकट।

कतर LNG संकट: भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
Qatar Gas Crisis: भारत समेत पूरी दुनिया में LNG (Liquefied Natural Gas) को लेकर बड़ा संकट गहराने की आशंका है। कतर के रास लफान औद्योगिक शहर पर हुए हमलों के बाद वैश्विक गैस सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नुकसान की भरपाई और रिपेयर में करीब 5 साल तक का समय लग सकता है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ेगा।
हमले से मची भारी तबाही
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायल के हमले के बाद हालात बिगड़ गए। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमले किए, जो दुनिया के सबसे बड़े LNG हब्स में से एक है। कतर की सरकारी कंपनी कतरएनर्जी (QatarEnergy) ने इस हमले में भारी नुकसान की पुष्टि की है।
साउथ पार्स और रास लफान दोनों ही वैश्विक LNG सप्लाई के प्रमुख केंद्र हैं, ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उछाल आना तय माना जा रहा है।
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LNG एक्सपोर्ट पर बड़ा असर
कतर सरकार के ऊर्जा मंत्री साद शेरिदा अल-काबी (Saad Sherida Al-Kaabi) के अनुसार: मिसाइल हमले से LNG एक्सपोर्ट क्षमता में 17% की गिरावट आई है, करीब 20 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। और पूरी तरह रिकवरी में 5 साल तक का समय लग सकता है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक LNG सप्लाई पर दबाव बना रहेगा।
भारत के लिए क्यों है बड़ी चिंता?
- भारत अपनी LNG जरूरतों के लिए कतर पर काफी हद तक निर्भर है।
- भारत ने 2024 में लगभग 27.8 मिलियन मीट्रिक टन LNG आयात किया।
- इसमें से 11.30 MMT (करीब 47%) LNG कतर से आया।
- इसकी कुल कीमत लगभग 6.40 बिलियन डॉलर रही।
ये आंकड़े पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (Petroleum Planning and Analysis Cell) (PPAC) और वाणिज्य मंत्रालय के हैं, जो बताते हैं कि कतर भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर है।
घरेलू बाजार पर क्या होगा असर?
कतर में उत्पादन और सप्लाई प्रभावित होने से भारत में:
- गैस की उपलब्धता कम हो सकती है।
- CNG और PNG के दाम बढ़ सकते हैं।
- बिजली उत्पादन लागत में इजाफा हो सकता है।
- इंडस्ट्री पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
- यानि आम जनता से लेकर उद्योग तक सभी पर इसका असर दिख सकता है।
पहले भी रुक चुका है उत्पादन
गौरतलब है कि 4 मार्च को कतर ने पहले ही LNG उत्पादन रोकने का ऐलान किया था। उस समय भारत की सबसे बड़ी LNG आयातक कंपनी Petronet LNG Limited को अपने जहाज भेजने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इसकी बड़ी वजह होरमुज़ जलसंधि (Strait of Hormuz) का लगभग बंद होना था, जो वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का अहम मार्ग है।
कतर में हुए हमलों ने सिर्फ एक देश नहीं बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। भारत जैसे देश, जो LNG के लिए कतर पर निर्भर हैं, उन्हें आने वाले समय में वैकल्पिक स्रोत खोजने और ऊर्जा रणनीति मजबूत करने की जरूरत होगी। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो LNG संकट और महंगाई दोनों भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना सकते हैं।



