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1 अप्रैल 2026 से बदल जाएगी आपकी सैलरी और शॉपिंग, नया इनकम टैक्स एक्ट ला रहा है ये बड़े बदलाव

भारत सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू करने जा रही है, जिससे सैलरी स्ट्रक्चर, क्रेडिट कार्ड खर्च और टैक्स नियमों में बड़े बदलाव होंगे।

भारत सरकार 1 अप्रैल 2026 से देश की कर व्यवस्था में एक जबरदस्त बदलाव करने जा रही है। दशकों पुराने नियमों को हटाकर अब ‘नया इनकम टैक्स एक्ट’ लागू किया जाएगा। इस नए कानून का सबसे बड़ा असर नौकरीपेशा लोगों की सैलरी स्ट्रक्चर और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर पड़ने वाला है। सरकार ने नियमों की जटिलता को कम करने के लिए कुल धाराओं की संख्या 511 से घटाकर 333 कर दी है।

क्रेडिट कार्ड खर्च पर इनकम टैक्स विभाग की पैनी नज़र

नए नियमों के तहत अब आपकी शॉपिंग और क्रेडिट कार्ड के खर्चों की जानकारी सीधे इनकम टैक्स विभाग के पास पहुंचेगी। यदि आप एक वित्तीय वर्ष में अपने क्रेडिट कार्ड से 10 लाख रुपये या उससे अधिक खर्च करते हैं, तो बैंक इसकी रिपोर्ट विभाग को सौंप देगा। इसके अलावा, यदि आप क्रेडिट कार्ड बिल का 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान नकद में करते हैं, तो आप विभाग की जांच के दायरे में आ सकते हैं। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब नया क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए PAN कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है।

सैलरी और भत्तों के लिए नया फिक्स फॉर्मूला

नए ड्राफ्ट रूल्स में कंपनी से मिलने वाली सुविधाओं जैसे घर, गाड़ी और फ्री मील की वैल्यू तय करने के लिए एक फिक्स फॉर्मूला तैयार किया गया है। अब कंपनी की ओर से मिलने वाली कार और ड्राइवर की सुविधा पर टैक्स की दरें बदल गई हैं। 1.6 लीटर इंजन तक की गाड़ी पर 5,000 रुपये और उससे बड़ी गाड़ी पर 7,000 रुपये प्रति माह टैक्स लगेगा, जबकि ड्राइवर के लिए 3,000 रुपये का टैक्स निर्धारित किया गया है।

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किराये के घर और शहर की आबादी के आधार पर टैक्स राहत

नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर यह है कि कंपनी द्वारा दिए गए घर पर अब कम टैक्स देना होगा। नए नियमों के अनुसार, 40 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में सैलरी का केवल 10% हिस्सा ही टैक्स के दायरे में आएगा (जो पहले 15% तक था)। इसी तरह, 15 से 40 लाख की आबादी वाले शहरों के लिए यह दर 7.5% और छोटे शहरों के लिए 5% तय की गई है। इससे कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

खाने के कूपन, गिफ्ट्स और बच्चों की पढ़ाई पर बड़ी छूट

सरकार ने दैनिक खर्चों और भत्तों की सीमा में भी इजाफा किया है। अब ऑफिस में मिलने वाले फ्री मील की लिमिट 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दी गई है, जो पूरी तरह टैक्स-फ्री होगी। इसके साथ ही, सालाना गिफ्ट्स और वाउचर की लिमिट भी 15,000 रुपये कर दी गई है। बच्चों की शिक्षा के लिए एजुकेशन अलाउंस 3,000 रुपये और हॉस्टल अलाउंस 9,000 रुपये प्रति माह तक टैक्स-फ्री रहेगा, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा।

ऑफिस कार्ड से पर्सनल शॉपिंग और कार्ड से टैक्स भुगतान

यदि आपको कंपनी की ओर से बिजनेस कार्ड मिला है, तो उसका निजी इस्तेमाल अब आपको महंगा पड़ सकता है। कंपनी के कार्ड से की गई पर्सनल शॉपिंग पर आपको टैक्स देना होगा, हालांकि बिजनेस मीटिंग या ट्रैवल खर्च पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब आप क्रेडिट कार्ड से अपना इनकम टैक्स भर सकेंगे। हालांकि, ध्यान रहे कि बैंक इस सुविधा के लिए अतिरिक्त सेवा शुल्क या ब्याज वसूल सकते हैं, जिससे आपका कुल टैक्स बिल थोड़ा बढ़ सकता है।

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