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अमेरिका का चौंकाने वाला दावा: होर्मुज में कहां बिछाया था बारूदी सुरंगों का जाल, भूल गया ईरान?

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को लेकर अमेरिका का बड़ा दावा सामने आया है। जानें क्या है पूरा मामला और इसका वैश्विक असर।

होर्मुज में बिछाई माइंस भूल गया ईरान?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (माइंस) का सटीक रिकॉर्ड खो दिया है। यह दावा न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

क्या है पूरा मामला?

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने पिछले वर्षों में सामरिक दबाव बनाने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में कई स्थानों पर समुद्री माइंस बिछाई थीं। लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि ईरान खुद ही यह तय नहीं कर पा रहा कि ये सुरंगें कहां-कहां मौजूद हैं। ईरान का यह कथित कदम उसकी सैन्य रणनीति पर सवाल खड़े करता है। वहीं अमेरिका का कहना है कि यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। बता दें कि भारत, चीन, जापान जैसे देशों की ऊर्जा आपूर्ति इससे जुड़ी है। ऐसे में यहां बारूदी सुरंगों का होना वैश्विक संकट को जन्म दे सकता है।

अमेरिका का बड़ा दावा

अमेरिकी रक्षा सूत्रों का कहना है कि ईरान ने बिना पूरी मैपिंग के माइंस बिछाईं। अब उन्हें हटाने में उसे कठिनाई हो रही है। यह स्थिति अनजाने में दुर्घटनाओं को जन्म दे सकती है। पेंटागन ने इसे “खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना” बताया है।

क्या हो सकते हैं इसके परिणाम?

1. वैश्विक व्यापार पर असर – अगर किसी जहाज को नुकसान पहुंचता है, तो तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं।

2. सैन्य तनाव में वृद्धि – ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और बढ़ सकता है।

3. भारत पर प्रभाव – भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में किसी भी अस्थिरता का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र में बिछाई गई माइंस को ट्रैक करना बेहद जटिल काम होता है। यदि सही रिकॉर्ड न रखा जाए, तो यह अपने ही देश के लिए खतरा बन सकती हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में माइंस को लेकर अमेरिका का यह दावा मिडिल ईस्ट की जटिल स्थिति को और गंभीर बनाता है। अगर यह सच है, तो यह न केवल ईरान की रणनीतिक चूक है बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी भी है।

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