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बंगाल बाबरी मस्जिद विवाद: टीएमसी विधायक कबीर का 6 दिसंबर प्लान, भाजपा में भड़का गुस्सा

मुर्शिदाबाद विवाद: टीएमसी विधायक का ‘बाबरी मस्जिद’ शिलान्यास ऐलान, बंगाल में भड़का राजनीतिक बवाल

बंगाल में नया विवाद: मुर्शिदाबाद में 6 दिसंबर को ‘बाबरी मस्जिद’ शिलान्यास का ऐलान, भाजपा ने ममता को घेरा |

मुर्शिदाबाद, 27 नवंबर 2025
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक नया सांप्रदायिक विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के बेलडांगा से विधायक और सांसद हुमायूं कबीर ने घोषणा की है कि 6 दिसंबर 2025 को वे बेलडांगा में ‘बाबरी मस्जिद’ का शिलान्यास करेंगे। यह वही तारीख है जब 1992 में अयोध्या की बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी।
25 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुमायूं कबीर ने कहा, “मुझे 1992 का विध्वंस बहुत दुखी करता है। मैं बंगाल में एक नई बाबरी मस्जिद बनवाऊंगा, जो तीन साल में तैयार हो जाएगी। यह शांति और सद्भाव का प्रतीक होगी।” अगले ही दिन बेलडांगा और आसपास के इलाकों में बड़े-बड़े पोस्टर चिपक गए, जिनमें लिखा था:
“बाबरी मस्जिद निर्माण शुभारंभ – 6 दिसंबर 2025”।

भाजपा का तीखा हमला

भाजपा ने इस घोषणा को आग में घी डालने वाला कदम बताया।

  • पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांता मजूमदार: “यह राष्ट्रीय भावनाओं का अपमान है। भारत की धरती पर बाबर के नाम की मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी।”
  • केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह: “टीएमसी बांग्लादेशियों-रोहिंग्या के सहारे बाबरी मस्जिद नहीं, बांग्लादेश की नींव रख रही है।”
  • भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला: “ममता बनर्जी की तुष्टिकरण की राजनीति का नंगा नाच। हिंदू देवियों का अपमान करने के बाद अब बाबरी का नाम लेकर वोट बटोर रहे हैं।”

सोशल मीडिया पर #BabriInBengal और #MamataAppeasement ट्रेंड करने लगे

टीएमसी ने किनारा किया

तृणमूल कांग्रेस ने फौरन खुद को अलग कर लिया।

  • वरिष्ठ टीएमसी नेता निरमल घोष: “हुमायूं कबीर का बयान व्यक्तिगत है, पार्टी इससे सहमत नहीं। उन्होंने लाइन क्रॉस कर दी।”
  • मुर्शिदाबाद की एक अन्य सांसद: “मस्जिद बनाना ठीक है, लेकिन नाम और तारीख से सांप्रदायिक तनाव पैदा करना गलत है।”

ममता बनर्जी ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। उधर, पुलिस ने पोस्टर हटाने शुरू कर दिए हैं और इलाके में फोर्स तैनात कर दी है।

क्यों है यह इतना संवेदनशील?

मुर्शिदाबाद मुस्लिम बहुल इलाका है और अप्रैल 2025 में वक्फ संशोधन बिल के विरोध में यहां भयानक हिंसा हो चुकी है। ‘बाबरी’ नाम और 6 दिसंबर की तारीख जानबूझकर पुराने जख्म कुरेदने जैसी लग रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद बंगाल की सियासत को और ध्रुवीकृत कर सकता है।संक्षेप में: एक विधायक का बयान, कुछ पोस्टर, और पूरे बंगाल में सांप्रदायिक तनाव की आशंका। सवाल यही है – क्या यह सचमुच शांति का प्रतीक बनेगा या नया दंगा भड़काने का बहाना?

bhaiyajgadmin

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