IIT Bombay Student Death: ‘बेटे को किया जा रहा था टारगेट’, जातिसूचक टिप्पणी का आरोप | Sahil Wakode Case
IIT Bombay Student Death Case में साहिल वाकोडे के पिता ने उत्पीड़न और जातिसूचक टिप्पणी के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है।
मुंबई: IIT बॉम्बे में 20 वर्षीय बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र के माता-पिता की शिकायत के बाद मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। परिवार ने आरोप लगाया है कि साहिल को कथित तौर पर लंबे समय से प्रताड़ित किया जा रहा था और उसके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां भी की गई थीं। इन आरोपों की जांच अभी जारी है।
पिता का आरोप- ‘बेटे को लगातार टारगेट किया जा रहा था’
साहिल के पिता रविंद्र ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से दबाव और कथित उत्पीड़न का सामना कर रहा था। उनके मुताबिक, साहिल को कथित तौर पर जाति को लेकर अपमानजनक शब्द कहे जाते थे और उसे निशाना बनाया जा रहा था।
परिवार का आरोप है कि इस कथित व्यवहार का साहिल पर गहरा असर पड़ा। पिता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है।
रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि एक प्रोफेसर द्वारा साहिल के साथ जातिगत भेदभाव किया गया। हालांकि, यह आरोप फिलहाल जांच का विषय हैं और जांच एजेंसी को यह पता लगाना है कि वास्तव में छात्र के साथ क्या हुआ था।
परीक्षा के दौरान मोबाइल मिलने के बाद क्या हुआ?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, साहिल शुक्रवार को एक परीक्षा में मोबाइल फोन के साथ पकड़े गए थे। कुछ रिपोर्टों में परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र को AI प्लेटफॉर्म पर भेजकर जवाब लेने का आरोप भी सामने आया है।
IIT बॉम्बे की ओर से बताया गया है कि छात्र के खिलाफ उस समय कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उन्हें शिक्षकों की ओर से काउंसलिंग दी गई थी। इसके कुछ घंटे बाद छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए।
यही घटनाक्रम अब जांच का अहम हिस्सा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि परीक्षा से जुड़ी घटना, छात्र की कथित परेशानी और उसकी मौत के बीच क्या संबंध था।
परिवार की शिकायत के बाद FIR, SC/ST Act की धाराएं भी लगीं
साहिल के माता-पिता की शिकायत के बाद पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की। परिवार की शिकायत में कथित जातिसूचक गालियों और उत्पीड़न का भी जिक्र किया गया, जिसके बाद SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के प्रावधान भी लगाए गए।
FIR में IIT बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला समेत कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का भी नाम सामने आया है। परिवार ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
क्राइम ब्रांच करेगी मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। परिवार ने जांच पर भरोसा जताते हुए उन परिस्थितियों की विस्तृत जांच की मांग की है, जिनके बीच साहिल की मौत हुई।
परिवार की ओर से यह भी मांग की गई है कि यदि जातिगत भेदभाव या मानसिक उत्पीड़न के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।
IIT बॉम्बे ने क्या कहा?
इस मामले में IIT बॉम्बे ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। संस्थान की ओर से पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही गई है।
इसलिए फिलहाल मामले के दो महत्वपूर्ण पक्ष सामने हैं—एक तरफ परिवार द्वारा लगाए गए जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के गंभीर आरोप, वहीं दूसरी तरफ संस्थान का इन आरोपों से इनकार। अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
छात्रों ने भी उठाए सवाल
साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे के कई छात्रों ने प्रदर्शन कर प्रशासन से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की। छात्रों की ओर से कैंपस में छात्रों की सुरक्षा, दबाव और संस्थागत व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए।
यह मामला अब सिर्फ एक छात्र की मौत तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ कैंपस में छात्रों पर दबाव, जातिगत भेदभाव के आरोप, परीक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और संस्थागत जवाबदेही जैसे कई सवाल भी जुड़े हैं।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
- क्या साहिल को वास्तव में जातिसूचक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा था?
- क्या छात्र को लगातार किसी तरह का कथित उत्पीड़न या दबाव झेलना पड़ा?
- परीक्षा के दौरान हुई घटना के बाद संस्थान ने क्या कदम उठाए?
- परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि किन सबूतों से होती है?
- क्या कथित घटनाओं का छात्र की मौत से कोई संबंध था?
- FIR में नामजद लोगों की भूमिका जांच में क्या सामने आती है?
इन सभी सवालों के जवाब पुलिस और क्राइम ब्रांच की जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।



