BRICS में जुटे दुनिया के बड़े नेता, लेकिन भारत के लिए क्या बदलेगा? तेल, डॉलर और कारोबार पर पड़ेगा असर?
BRICS Business Forum 2026 में ईरान, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों के नेता जुटे। व्यापार, पेमेंट, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी पर चर्चा से भारत और आम भारतीयों पर क्या असर पड़ेगा? जानिए पूरी जानकारी।

नई दिल्ली: भारत की राजधानी दिल्ली में BRICS Business Forum के दौरान दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता और प्रतिनिधि एक मंच पर नजर आए। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने इस बैठक को खास बना दिया है।
लेकिन इस बैठक की सबसे बड़ी खबर सिर्फ नेताओं की मौजूदगी नहीं है। BRICS के मंच पर जिन आर्थिक मुद्दों पर चर्चा हो रही है, उनका सीधा असर आने वाले समय में भारत के कारोबार, भुगतान व्यवस्था, ऊर्जा और आम लोगों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
आखिर BRICS में क्या हो रहा है?
भारत की अध्यक्षता में हो रहे BRICS कार्यक्रमों में देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने, मजबूत supply chains तैयार करने, cross-border payments को बढ़ावा देने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही AI और नई तकनीक में सहयोग को भी अहम माना जा रहा है।
ईरान के राष्ट्रपति ने भी BRICS supply chains में ईरान की भूमिका मजबूत करने और व्यापार तथा payment mechanisms को diversify करने पर जोर दिया है।
🇮🇳 भारत को इससे क्या फायदा हो सकता है?
अगर BRICS देशों के बीच व्यापार और payment systems में सहयोग आगे बढ़ता है, तो भारत के लिए नए export markets, बेहतर व्यापारिक विकल्प और डॉलर पर निर्भरता कम करने की संभावनाएं बन सकती हैं।
इसके अलावा मजबूत supply-chain cooperation से भारतीय कंपनियों को दूसरे BRICS देशों के बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। BRICS Startup Innovation Fund और Incubator Network जैसे प्रस्ताव भी सामने हैं, जिनका फायदा भविष्य में भारतीय startups और entrepreneurs को मिल सकता है।
आम भारतीय पर क्या असर पड़ेगा?
यहां सबसे बड़ा सवाल तेल और महंगाई का है।मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण oil trade और Strait of Hormuz को लेकर चिंता बनी हुई है और crude oil की कीमतें भी प्रभावित हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में बड़ा बदलाव आने पर इसका असर पेट्रोल-डीजल, transport cost और महंगाई पर पड़ सकता है।
यानी BRICS की यह बैठक केवल विदेश नीति का मामला नहीं है—इसका असर भारत की economy और आम आदमी की जेब तक पहुंच सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
क्या BRICS सिर्फ एक बड़ा diplomatic मंच बनकर रहेगा, या भारत समेत सदस्य देश trade, payment, energy और technology में ऐसी व्यवस्था तैयार कर पाएंगे जिसका फायदा सीधे उनकी economies को मिले?
आने वाले BRICS Leaders’ Summit में होने वाले फैसलों पर अब पूरी दुनिया की नजर है।




