
Mumbai News: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों से जुड़ा मराठी भाषा का नियम अब अपने अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। 15 अगस्त 2026 की डेडलाइन खत्म होने के बाद 16 अगस्त से नियमों के पालन को लेकर कार्रवाई और भाषा जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। ऐसे में महाराष्ट्र में काम करने वाले गैर-मराठी भाषी ऑटो-टैक्सी चालकों के बीच हलचल तेज है।
कल खत्म हो रही है डेडलाइन, फिर क्या?
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने गैर-मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए ‘मराठी भाषा संवाद पाठ्यक्रम’ पूरा करने की व्यवस्था की है। इसके तहत 1 जून से 15 अगस्त 2026 तक चार घंटे का प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाणपत्र हासिल करना है।
परिवहन विभाग के मुताबिक, 15 अगस्त के बाद जिन चालकों के पास जरूरी प्रमाणपत्र नहीं होगा, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा है कि अभियान का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि चालकों को मुफ्त प्रशिक्षण लेकर भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है।
आखिर मराठी सीखना क्यों जरूरी किया गया?
सरकार का तर्क है कि ऑटो-टैक्सी चालक सीधे यात्रियों से जुड़े होते हैं। ऐसे में स्थानीय भाषा की बुनियादी समझ होने से ड्राइवर और यात्री के बीच संवाद बेहतर होगा और सेवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
इस पहल के तहत मुंबई महानगर क्षेत्र में 71 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं की मदद से चालकों को प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
16 अगस्त से क्या होगा?
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 16 अगस्त से भाषा दक्षता की जांच/फील्ड टेस्ट की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई है। इससे उन चालकों की चिंता बढ़ गई है जिन्होंने अभी तक प्रशिक्षण या प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूरी नहीं की है।
यानी 15 अगस्त सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए एक महत्वपूर्ण डेडलाइन बन गई है।
नियम पर क्यों हो रही है बहस?
मराठी भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार के इस कदम को लेकर अलग-अलग राय सामने आई हैं। समर्थकों का कहना है कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन से जुड़े लोगों को स्थानीय भाषा की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए। वहीं आलोचकों की चिंता यह है कि सख्त कार्रवाई का असर खासकर गैर-मराठी भाषी और प्रवासी ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर पड़ सकता है।
पहले इस मुद्दे पर ऑटो-टैक्सी संगठनों की ओर से विरोध भी सामने आया था, जिसके बाद डेडलाइन को 15 अगस्त तक बढ़ाया गया था।
अब नजर 16 अगस्त पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 अगस्त के बाद महाराष्ट्र में कितने ड्राइवरों पर कार्रवाई होती है और भाषा नियम को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है। 16 अगस्त से शुरू होने वाली प्रक्रिया इस पूरे विवाद की अगली तस्वीर साफ कर सकती है।




