TMC के 20 सांसद-60 विधायक छोड़ गए साथ… ममता की ढाल बन गए बिहार के ये दो नेता!
पश्चिम बंगाल में TMC पर सियासी संकट गहराता दिख रहा है। 20 सांसदों और 60 विधायकों की बगावत के दावों के बीच ममता बनर्जी के समर्थन में बिहार के दो बड़े नेता मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। जानिए पूरी कहानी।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों ऐसा भूचाल आया है, जिसने देशभर के राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कभी पूरे बंगाल की राजनीति पर दबदबा रखने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब अपने ही नेताओं की नाराजगी और बगावत की खबरों से घिरी दिखाई दे रही है।दावों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता गया। पहले विधायकों के बागी होने की खबरें सामने आईं और अब लोकसभा सांसदों के एक बड़े धड़े के अलग रुख अपनाने की चर्चा तेज हो गई है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि करीब 20 सांसदों ने अलग गुट बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जबकि 60 से अधिक विधायक भी पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं।
आखिर ममता के साथ कौन खड़ा है?
जब पार्टी के कई पुराने चेहरे दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं, तब दो ऐसे नेता हैं जो खुलकर ममता बनर्जी के समर्थन में उतर आए हैं। दिलचस्प बात यह है कि दोनों नेताओं का संबंध बिहार से है।
पहला नाम है Shatrughan Sinha का। TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने खुद को “तीन लाइन का व्हिप” जारी किया है—वह पहले भी ममता बनर्जी के साथ थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में ममता बनर्जी ने उनका साथ दिया था, इसलिए वह उन्हें छोड़ने की कल्पना भी नहीं कर सकते।
दूसरा बड़ा नाम है Kirti Azad का। कीर्ति आजाद भी लगातार पार्टी नेतृत्व के पक्ष में खड़े नजर आए हैं। उन्होंने बागी सांसदों के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई नेता पार्टी छोड़ना चाहता है तो पहले सांसद पद से इस्तीफा दे और फिर नया रास्ता चुने।
TMC में बगावत या सियासी दबाव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद किसी भी पार्टी में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक होता है, लेकिन TMC में जो घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, वे पार्टी के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। कुछ नेताओं ने संगठन में फैसलों को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे राजनीतिक साजिश और अवसरवाद बता रहा है।
क्या ममता संभाल पाएंगी मोर्चा?
ममता बनर्जी भारतीय राजनीति की उन नेताओं में गिनी जाती हैं जिन्होंने कई बार मुश्किल हालात से वापसी की है। लेकिन इस बार चुनौती अलग है। सवाल सिर्फ विपक्ष से लड़ने का नहीं, बल्कि अपने ही घर में उठ रहे असंतोष को शांत करने का है।
ऐसे समय में शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद जैसे नेताओं का खुलकर समर्थन करना ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक ऑक्सीजन साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC इस संकट से उबरती है या बंगाल की राजनीति में कोई नया अध्याय लिखने जा रहा है।




