Most Educated Countries in the World:: दुनिया के टॉप 10 सबसे पढ़े-लिखे देश, जानें भारत किस नंबर पर
A new list of the world's most educated countries has been released. Countries like Canada, Japan, and Ireland top the list. Learn about India's position in this global ranking based on higher education and how it is determined. दुनिया के सबसे पढ़े-लिखे देशों की नई लिस्ट सामने आई है। कनाडा, जापान और आयरलैंड जैसे देश टॉप पर हैं। जानें उच्च शिक्षा के आधार पर तैयार इस वैश्विक रैंकिंग में भारत किस स्थान पर है और इसे कैसे तय किया जाता है।
Top 10 Most Educated Countries in the World, Where does India stand in this among educated countries?
Most Educated Countries in the World: आज के दौर में किसी भी देश की तरक्की का सबसे बड़ा आधार उसकी शिक्षा व्यवस्था और कुशल मानव संसाधन को माना जाता है। जिस देश में उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों की संख्या ज्यादा होती है, वहां आर्थिक विकास, रिसर्च और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी देखने को मिलती है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि दुनिया के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे देशों की सूची में कौन-कौन से देश शामिल हैं और इस रैंकिंग में भारत की स्थिति क्या है।
UNESCO के आंकड़े क्या बताते हैं
संयुक्त राष्ट्र की शिक्षा से जुड़ी संस्था UNESCO (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में दुनिया भर में उच्च शिक्षा तक पहुंच तेजी से बढ़ी है। साल 2000 के बाद से कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर स्किल्ड वर्कफोर्स (Skilled workforce) की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए देश शिक्षा और रिसर्च में ज्यादा निवेश कर रहे हैं।
रैंकिंग में किस आयु वर्ग के लोगों का किया जाता है चयन
सबसे पढ़े-लिखे देशों की सूची तैयार करते समय आमतौर पर 25 से 64 वर्ष की आयु वर्ग के वयस्कों को ध्यान में रखा जाता है। इस आयु समूह में यह देखा जाता है कि कितने प्रतिशत लोगों ने कॉलेज या उससे ऊपर की शिक्षा पूरी की है।
यह डेटा मुख्य रूप से OECD (Organisation for Economic Co-operation and Development) द्वारा एकत्र किया जाता है। अलग-अलग देशों की तुलना के लिए ISCED (International Standard Classification of Education) के मानकों का उपयोग किया जाता है।
दुनिया के टॉप 10 सबसे पढ़े-लिखे देश
वैश्विक रिपोर्ट्स के मुताबिक, वयस्क आबादी में उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों के प्रतिशत के आधार पर दुनिया के सबसे शिक्षित देशों की सूची कुछ इस प्रकार है:
- कनाडा – 63%
- जापान – 56%
- आयरलैंड – 54%
- दक्षिण कोरिया – 53%
- यूनाइटेड किंगडम – 52%
- अमेरिका – 50%
- ऑस्ट्रेलिया – 50%
- फिनलैंड – 49%
- नॉर्वे – 48%
- स्विट्ज़रलैंड – 47%
इन देशों में मजबूत विश्वविद्यालय प्रणाली, रिसर्च पर बड़ा निवेश और इंडस्ट्री-एकेडेमिया सहयोग को उनकी सफलता का प्रमुख कारण माना जाता है।
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शिक्षा की वैश्विक रैंकिंग कैसे होती है तय
शिक्षा से जुड़ी वैश्विक रैंकिंग तैयार करने के लिए OECD सदस्य देशों और अन्य राष्ट्रों से डेटा एकत्र किया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि 25-64 वर्ष आयु वर्ग के कितने लोगों ने बैचलर, मास्टर या पीएचडी जैसी डिग्री प्राप्त की है।
यह रैंकिंग केवल साक्षरता दर पर आधारित नहीं होती, बल्कि यह बताती है कि किसी देश की आबादी का कितना हिस्सा उच्च शिक्षा प्राप्त और पेशेवर कौशल से लैस है। इससे यह भी अंदाजा लगता है कि उस देश की कार्यशक्ति कितनी सक्षम और प्रतिस्पर्धी है।
शिक्षा के मामले में भारत कहां खड़ा है?
2026 के वैश्विक अनुमानों के अनुसार, भारत अभी दुनिया के टॉप 10 सबसे पढ़े-लिखे देशों की सूची में शामिल नहीं है। उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के आधार पर भारत आमतौर पर 40वें से 50वें स्थान के बीच देखा जाता है।
इसका मुख्य कारण यह है कि भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त वयस्कों का प्रतिशत अभी विकसित देशों की तुलना में कम है। हालांकि हाल के वर्षों में विश्वविद्यालयों की संख्या, कॉलेजों और नामांकन दर में तेजी से वृद्धि हुई है।
भारत के लिए क्या है आगे की चुनौती
भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार तो तेजी से हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, अब सबसे बड़ी जरूरत क्वालिटी एजुकेशन और रिसर्च पर निवेश बढ़ाने की है। इसके अलावा इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार स्किल-आधारित पाठ्यक्रम और डिजिटल ट्रेनिंग को भी बढ़ावा देना जरूरी माना जा रहा है।
क्या भविष्य में बदल सकती है यह रैंकिंग
दुनिया के सबसे शिक्षित देशों की सूची में फिलहाल अधिकतर विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, क्योंकि उन्होंने लंबे समय से शिक्षा और रिसर्च पर निवेश किया है।
हालांकि एशिया और अफ्रीका के कई विकासशील देश तेजी से अपने शिक्षा ढांचे को मजबूत कर रहे हैं। ऑनलाइन लर्निंग, डिजिटल एजुकेशन और स्किल प्रोग्राम भविष्य में इस अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।




