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ईरान पर डोनाल्ड ट्रंप के विवादित बयान से हड़कंप, मार्जरी टेलर ग्रीन ने कहा- 'राष्ट्रपति पागलपन' की स्थिति में हैं।'

Strait of Hormuz को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की धमकी भरी टिप्पणी पर अमेरिका में विवाद, नेताओं ने जताई चिंता, जानिए पूरी खबर।

ट्रंप की भाषा पर उठे सवाल, नेताओं ने कहा- राष्ट्रपति पद के लायक नहीं बयान

Middle East Tension: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप के एक विवादित बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने ईरान को Strait of Hormuz को लेकर कड़ी चेतावनी देते हुए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिस पर अमेरिका के कई नेताओं ने गंभीर चिंता जताई है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ईरान को धमकी दी कि यदि होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो उसके एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और पुलों पर बड़े हमले किए जा सकते हैं। उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘ईरान में मंगलवार को पावर प्लांट और ब्रिज डे होगा… होर्मुज स्ट्रेट खोलो, नहीं तो नर्क में जीओगे’। उनके बयान में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है, जिसे कई लोग राष्ट्रपति पद की गरिमा के खिलाफ बता रहे हैं।

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क्यों अहम है Strait of Hormuz?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान के बाद यह मार्ग लगभग बंद हो गया है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

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अमेरिकी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

चक शूमर समेत कई अमेरिकी नेताओं ने ट्रंप के बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे एक गैर-जिम्मेदाराना और असंतुलित बयान बताया, जो अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।

अमेरिकी सीनेट के सदस्य और डेमोक्रेटिक पार्टी के ​वरिष्ठ नेता चक शूमर ने ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयान को ‘एक असंतुलित व्यक्ति की बकवास बताया’ है। उन्होंने कहा कि ट्रंप का यह रवैया अमेरिका के सहयोगियों को उससे दूर कर रहा है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के हालिया बयान को युद्ध अपराध की धमकी देने जैसा बताया है।

वहीं, ट्रंप की पूर्व सहयोगी मार्जरी टेलर ग्रीन ने भी उनके बयान नाराजगी जताते हुए कहा, कि राष्ट्रपति ‘पागलपन’ की स्थिति में हैं।’ इस तरह की भाषा किसी भी राष्ट्रपति के लिए उचित नहीं है। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के लोगों से दखल देने की अपील की. टेलर ग्रीन ने कहा कि यह युद्ध बिना उकसावे के शुरू किया गया और इससे निर्दोष लोगों की जान जा रही है।

भारत से भी आई प्रतिक्रिया

इस मुद्दे पर उमर अब्दुल्ला ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वीकार्य नहीं है और इससे हालात और बिगड़ सकते हैं।

युद्धविराम की बढ़ती मांग

बढ़ते तनाव के बीच अब वैश्विक स्तर पर युद्धविराम की मांग तेज हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने एक बार फिर दिखाया है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शब्दों का कितना बड़ा असर होता है। मौजूदा हालात में संयम और कूटनीति ही शांति का रास्ता दिखा सकती है।

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