
लखनऊ: जातीय जनगणना के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार जातीय जनगणना से बचने के लिए ‘चालबाजी’ कर रही है। उन्होंने कहा कि जातीय आंकड़े सामने आने के बाद सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना होगा।
जातीय जनगणना पर फिर गरमाई सियासत
जातीय जनगणना को लेकर देश की राजनीति में लंबे समय से बहस जारी है। अखिलेश यादव इस मुद्दे को लगातार सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के अधिकारों से जोड़ते रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने आरोप लगाया था कि जातीय जनगणना नहीं होने से आनुपातिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण के लिए जरूरी आंकड़ों का आधार तैयार नहीं होगा।
‘जातीय आंकड़े सामने आने चाहिए’
अखिलेश यादव का कहना है कि देश में अलग-अलग सामाजिक वर्गों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जातीय आंकड़ों का सामने आना जरूरी है। उनका तर्क है कि इन आंकड़ों के आधार पर ही सामाजिक और आर्थिक नीतियों को अधिक प्रभावी तरीके से तैयार किया जा सकता है।
आरक्षण और प्रतिनिधित्व भी बड़ा मुद्दा
जातीय जनगणना की मांग के पीछे आरक्षण, सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे भी जुड़े हैं। अखिलेश यादव पहले भी कह चुके हैं कि जातीय जनगणना के आंकड़े सामने आने के बाद आरक्षण और प्रतिनिधित्व से जुड़े सवालों पर ठोस चर्चा संभव होगी।
2027 से पहले UP में बढ़ेगी सियासी गर्मी?
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातीय जनगणना का मुद्दा सियासी तौर पर अहम होता जा रहा है। समाजवादी पार्टी इसे PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) राजनीति से जोड़कर लगातार उठाती रही है। मई 2026 में भी अखिलेश यादव ने कहा था कि सत्ता में आने पर उनकी सरकार शुरुआती 90 दिनों में जातीय जनगणना कराने की दिशा में काम करेगी।
ऐसे में अखिलेश यादव का ताजा बयान यूपी की राजनीति में जातीय जनगणना, आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला सकता है।

