Delhi Bus Gang Rape Case: नाबालिग से चलती बस में गैंगरेप, पुलिस ने दाखिल की 400 पन्नों की चार्जशीट
Delhi Bus Gang Rape Case: नाबालिग से चलती बस में गैंगरेप मामले में दिल्ली पुलिस ने करीब 400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जानिए मामले की पूरी जानकारी।
दिल्ली बस गैंगरेप मामले में 400 पन्नों की चार्जशीट
नई दिल्ली: दिल्ली में चलती बस में नाबालिग लड़की से कथित गैंगरेप के मामले में पुलिस ने अदालत में करीब 400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में बस चालक कुलदीप और परिचालक संदीप को आरोपी बनाया गया है। दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, नाबालिग लड़की ग्रेटर नोएडा से दिल्ली की ओर यात्रा कर रही थी। आरोप है कि चलती स्लीपर बस में चालक और परिचालक ने उसके साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया। बाद में उसे कश्मीरी गेट आईएसबीटी के पास बस से उतार दिया गया। मामले में कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना 4 अगस्त 2026 की है और लड़की की यात्रा ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर की थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर बस को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा था।
चार्जशीट में क्या-क्या शामिल?
रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस की चार्जशीट करीब 398 से 400 पन्नों की है। इसमें अभियोजन पक्ष के करीब 50 गवाहों के बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट शामिल की गई है। जांच के दौरान जुटाए गए जैविक साक्ष्यों को भी केस का हिस्सा बनाया गया है।
पुलिस जांच में बस की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं की भी जांच की गई। रिपोर्टों के अनुसार बस में CCTV की स्थिति, GPS/व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन जैसे सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और कार्यशीलता की भी पड़ताल की गई। बस पर लंबित ट्रैफिक चालानों और चालक-कंडक्टर के पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़े पहलुओं की भी जांच हुई।
POCSO एक्ट के तहत मामला
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ POCSO Act की धारा 6 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है। नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों में POCSO कानून के तहत गंभीर दंडात्मक प्रावधान लागू होते हैं।
मामले की जांच में फोरेंसिक साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जैविक नमूनों को फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी भेजा गया था और उनकी रिपोर्ट को जांच का हिस्सा बनाया गया।
NHRC ने भी लिया था संज्ञान
इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी स्वतः संज्ञान लिया था। आयोग ने दिल्ली और गौतमबुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नरों तथा मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच की स्थिति और पीड़िता को दिए गए मुआवजे समेत विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चार्जशीट में आरोप लगाए जाना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है; आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर होगा।