“एक देश, एक कानून!” शादी से तलाक तक सबके लिए समान नियम, UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य बना असम
देश में एक बार फिर समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर बहस तेज हो गई है। Assam ने UCC विधेयक लागू कर बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक कदम उठा लिया है। इसके साथ ही असम, Uttarakhand और Gujarat के बाद ऐसा करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है।
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक ही सवाल चर्चा में है —
क्या अब पूरे देश में “One Nation, One Law” लागू होने की राह तैयार हो रही है?
आखिर UCC क्या है?
Uniform Civil Code यानी UCC का मतलब है कि शादी, तलाक, संपत्ति, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू हो। अभी भारत में अलग-अलग धर्मों के अनुसार अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू होते हैं। UCC लागू होने के बाद इन मामलों में एक कॉमन सिविल कानून लागू किया जा सकता है। सरकार और समर्थकों का मानना है कि इससे समानता और न्याय को बढ़ावा मिलेगा, जबकि विरोध करने वाले लोग इसे धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता से जोड़कर देख रहे हैं।
असम सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
Himanta Biswa Sarma सरकार लंबे समय से UCC को लेकर स्पष्ट रुख दिखाती रही है। सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता समाज में समान अधिकार और पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ असम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
जैसे ही असम में UCC लागू होने की खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर #UCC, #UniformCivilCode और #Assam तेजी से ट्रेंड करने लगे। कुछ लोग इसे “नए भारत की शुरुआत” बता रहे हैं, तो कुछ इसे देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।
लोगों के मन में अब कई सवाल हैं —
- क्या अब शादी और तलाक के नियम बदलेंगे?
- क्या सभी धर्मों के लिए एक जैसा कानून लागू होगा?
- क्या पूरे भारत में UCC लागू किया जाएगा?
- आम लोगों की जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ेगा?
क्या पूरे देश में लागू होगा UCC?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में केंद्र सरकार पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम का यह कदम आने वाले चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि UCC पर बहस अब और तेज होने वाली है।




