जर्मनी के गुरुद्वारे में सिखों के दो गुटों में खूनी संघर्ष; बंदूक और चाकू से हमला, 11 लोग घायल
जर्मनी के डुइसबर्ग स्थित गुरुद्वारे में सिखों के दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प में 11 लोग घायल। बोर्ड चुनाव और फंड विवाद के कारण चली गोलियां और चाकू। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

जर्मनी के गुरुद्वारे में हिंसक झड़प: बोर्ड चुनाव और फंड विवाद के कारण चली गोलियां
Germany Gurdwara Controversy: जर्मनी के मोर्स (Moers) शहर के डुइसबर्ग (Duisburg) इलाके में स्थित एक गुरुद्वारे में हुई हिंसक झड़प ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। सोमवार को हुई इस घटना में सिखों के दो गुट आपस में भिड़ गए, जिसमें चाकू, कृपाण और पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया। इस हिंसक घटना में 11 लोग घायल हुए हैं।
क्या है विवाद की असली वजह?
जर्मन अखबार ‘बिल्ड’ (Bild) की रिपोर्ट के अनुसार, यह झड़प रातों-रात नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चल रहा विवाद है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों गुटों के बीच गुरुद्वारे के नियंत्रण और वर्चस्व को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- बोर्ड चुनाव: गुरुद्वारे की नई प्रबंध समिति (Board of Directors) के चुनाव को लेकर दो गुटों में गहरी खींचतान चल रही थी।
- फंड का प्रबंधन: विवाद का दूसरा बड़ा कारण गुरुद्वारे के फंड और चंदे का प्रबंधन है, जिस पर अलग-अलग गुट अपना मालिकाना हक और नियंत्रण चाहते हैं।
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क्या हुआ था गुरुद्वारे में?
सुनियोजित हमला: चश्मदीदों के अनुसार, सेवा (प्रार्थना) शुरू होने से ठीक पहले हमलावरों ने अचानक पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और फिर स्थिति हिंसक हो गई।
- हथियारों का उपयोग: झड़प के दौरान चाकू, कृपाण और कथित तौर पर एक पिस्तौल का उपयोग किया गया।
- पुलिस की कार्रवाई: सूचना मिलते ही जर्मन पुलिस और विशेष सामरिक इकाइयों (Special Tactical Units) ने मोर्चा संभाला। घटनास्थल से कारतूस के खोखे बरामद किए गए हैं, जिससे शुरुआती जांच में पता चला है कि इस्तेमाल की गई बंदूक ‘ब्लैंक-फायरिंग’ पिस्तौल थी।
- गिरफ्तारी: पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है, हालांकि मुख्य हथियार (बंदूक) की तलाश जारी है।
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पुलिस का एक्शन और जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की विशेष सामरिक इकाइयों को तुरंत तैनात किया गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। पुलिस ने अब तक एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। हालांकि वह हथियार (बंदूक) बरामद नहीं हुआ है, लेकिन घटनास्थल पर मिले कारतूसों के खोखे के आधार पर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वह संभवतः एक ‘ब्लैंक-फायरिंग’ पिस्तौल थी। पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
प्रत्यक्षदर्शियों का बयान
घटना के प्रत्यक्षदर्शी, जो संगत का हिस्सा हैं, ने ‘बिल्ड’ को बताया कि यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित (Pre-planned) लग रहा था। उनके अनुसार, हमलावरों ने सेवा शुरू होने से ठीक पहले पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और उसके बाद स्थिति बिगड़ गई। उन्होंने चाकू चलने और गोली चलने की आवाज भी सुनी। हालांकि, शुक्र है कि किसी की जान नहीं गई।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
इस पूरी घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें धार्मिक परिसर के भीतर हाथापाई होती साफ देखी जा सकती है। हालांकि, प्रशासन द्वारा इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि की जानी अभी बाकी है।
घायलों की स्थिति
‘बिल्ड’ (Bild) अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, घायलों को घटनास्थल पर ही पैरामेडिक्स और आपातकालीन डॉक्टरों द्वारा प्राथमिक उपचार दिया गया। गनीमत रही कि इस खूनी झड़प में किसी की जान नहीं गई, लेकिन परिसर में मची अफरा-तफरी ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।
जर्मनी के इस गुरुद्वारे में हुई घटना ने धार्मिक स्थानों की पवित्रता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और विवाद के असली कारणों का पता लगाया जा सके।




