पुरानी दिल्ली में अंडरग्राउंड वायरिंग प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार, Chandni Chowk में दिखेगा बड़ा बदलाव
राज्य सरकार ने अंडरग्राउंड वायरिंग प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत ऐतिहासिक इलाके में फैले जर्जर और उलझे तारों को जमीन के नीचे शिफ्ट किया जाएगा।The state government has given the green signal to the underground wiring project, under which the dilapidated and tangled wires spread across the historical area will be shifted underground.
Old Delhi Development Update: Chandni Chowk में अंडरग्राउंड वायरिंग से बदलेगा ऐतिहासिक बाजार का चेहरा
नई दिल्ली: पुरानी दिल्ली (Delhi) की तंग गलियों में वर्षों से लटकते बिजली के तार से आम जनता बेहद परेशान थी। अब राज्य सरकार ने अंडरग्राउंड वायरिंग प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत ऐतिहासिक इलाके में फैले जर्जर और उलझे तारों को जमीन के नीचे शिफ्ट किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब ₹159.47 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) द्वारा इस परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन टाउन हॉल के बाहर प्रस्तावित है, जहां ऊर्जा मंत्री आशीष सूद (Ashish Sood), सांसद प्रवीण खंडेलवाल (MP Praveen Khandelwal), पार्षद सुमन गुप्ता (Councilor Suman Gupta) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
26 सड़कों और कूचों में होगा अंडरग्राउंड वायरिंग का काम
दूसरे चरण में कुल 26 सड़कों, गलियों और कूचों में बिजली के लटकते तारों को हटाकर भूमिगत केबल बिछाई जाएंगी। इससे पहले 2021 में लाल जैन मंदिर (Jain Temple) से फतेहपुरी मस्जिद तक लगभग 1.3 किलोमीटर लंबे मुख्य मार्ग पर अंडरग्राउंड वायरिंग का काम पूरा किया गया था, जिसे स्थानीय व्यापारियों और पर्यटकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी।
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आग की घटनाओं और हादसों पर लगेगा लगाम
इस समय चांदनी चौक (Chandni Chowk), नई सड़क, किनारी बाजार, दरीबा, कूचा महाजनी, भागीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार (Chawri Bazaar), लाल कुआं और मटिया महल जैसे इलाकों में बिजली के तार खतरनाक रूप से उलझे हुए हैं। कई स्थानों पर ये तार इतने नीचे झूलते हैं कि हादसों की आशंका बनी रहती है।
उलझे तारों के कारण शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। दिल्ली के हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
बिजली के साथ इंटरनेट और केबल लाइन भी होंगी अंडरग्राउंड
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, हवेली धरमपुरा, कौड़िया पुल और मस्जिद खजूर जैसे संवेदनशील इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू किया जाएगा। बिजली लाइनों के साथ-साथ इंटरनेट और केबल नेटवर्क के लिए अलग डक्ट सिस्टम तैयार किया जाएगा, ताकि भविष्य में दोबारा अव्यवस्था न फैले।
बिजली वितरण कंपनियों को इस कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
व्यापारियों की मांग पर आगे बढ़ी योजना
चांदनी चौक से सांसद बनने के बाद प्रवीण खंडेलवाल ने व्यापार मंडलों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई दौरे की बैठकें की। फिर इस समस्या का समाधान निकालने की दिशा में पहल की। उनके द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के बाद सरकार ने परियोजना को गति दी।
स्थानीय पार्षद सुमन गुप्ता का कहना है कि यह योजना सिर्फ तारों को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे बाजार क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे में सुधार की शुरुआत होगी।
अंडरग्राउंड वायरिंग प्रोजेक्ट: अब तक की प्रमुख घटनाएं
2011: शाहजहानाबाद रीडेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (SRDC) के तहत अंडरग्राउंड वायरिंग की शुरुआत, लेकिन कार्य अधूरा रह गया।
2015: मुख्य सड़क पर दोबारा काम शुरू हुआ, पर परियोजना पूरी नहीं हो सकी।
2017: Delhi High Court ने क्षेत्र को “टाइम बम” जैसा बताते हुए सुरक्षा को लेकर सख्त टिप्पणी की।
2018–2021: लाल जैन मंदिर से फतेहपुरी चौक तक 1.3 किमी हिस्से में अंडरग्राउंड वायरिंग सफलतापूर्वक पूरी की गई।
क्या होगा फायदा?
- आग और शॉर्ट सर्किट की घटनाओं में कमी आएगी।
- बाजार क्षेत्र का बेहतर सौंदर्यीकरण होगा।
- पर्यटकों के लिए सुरक्षित और साफ-सुथरा माहौल होगा।
- भविष्य में स्मार्ट सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा।
पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक बाजारों में यह बदलाव न सिर्फ सुरक्षा बल्कि विरासत संरक्षण की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह परियोजना राजधानी के अन्य पुराने इलाकों के लिए भी मॉडल बन सकती है।
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