ईरान के खिलाफ अमेरिका के साथ सऊदी अरब, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप का किया समर्थन
ईरान के खिलाफ जारी युद्ध में सऊदी अरब ने अमेरिका का समर्थन किया है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप के साथ मिलकर रणनीतिक सहयोग का संकेत दिया।

Middle East Tension: मध्य पूर्व में जारी तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। इस बीच सऊदी अरब का रुख भी साफ नजर आने लगा है, जहां से अमेरिका को खुला समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।
युद्ध का 26वां दिन, खाड़ी देशों तक पहुंचा संघर्ष
अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे टकराव के बीच ईरान ने अपने हमलों का दायरा बढ़ाते हुए खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों पर भी हमले किए गए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में और ज्यादा तनाव बढ़ गया है।
सऊदी अरब ने अमेरिका का दिया साथ
मोहम्मद बिन सलमान (Mohammed bin Salman) ने इस पूरे मामले में अमेरिका के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया है। वहीं डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने भी यह संकेत दिया है कि सऊदी नेतृत्व इस संघर्ष में अमेरिका के साथ खड़ा है।
ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, कि सऊदी क्राउन प्रिंस न केवल समर्थन दे रहे हैं बल्कि इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार भी हैं।
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ट्रंप का बयान: “वह हमारे साथ लड़ रहे हैं”
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि मोहम्मद बिन सलमान एक मजबूत नेता हैं और इस समय अमेरिका के साथ मिलकर रणनीतिक रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने उन्हें “योद्धा” तक बताया।
रिपोर्ट में बड़ा दावा
दी न्यू यौर्क टाइम्स (The New York Times) की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी प्रिंस का मानना है कि यह युद्ध मध्य पूर्व को नए सिरे से आकार देने का मौका है। उन्होंने अमेरिका को तेहरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की सलाह दी है।
ईरान के खिलाफ क्यों खड़ा हुआ सऊदी अरब?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व ईरान को खाड़ी क्षेत्र के लिए एक बड़ा और दीर्घकालिक खतरा मानता है। क्राउन प्रिंस का मानना है कि ईरान की मौजूदा सत्ता क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण है। इस खतरे को खत्म करने के लिए सख्त और लगातार सैन्य अभियान जरूरी है।
बढ़ता तनाव, वैश्विक चिंता
मध्य पूर्व में इस बढ़ते टकराव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। कई देशों की नजर अब इस बात पर है कि यह संघर्ष आगे किस दिशा में जाएगा और इसका अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।



