दिल्ली: राजघाट पहुंचे अरविंद केजरीवाल, सत्याग्रह का ऐलान, न्यायिक प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को नमन किया और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सत्याग्रह का ऐलान किया। जानिए पूरा मामला और विवाद।

कोर्ट में पेश नहीं होंगे AAP नेता
दिल्ली में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम के तहत अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ राजघाट (Raj Ghat) पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके साथ मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) और आतिशी मार्लेना (Atishi Marlena) भी मौजूद रहीं। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब केजरीवाल ने एक बड़े कानूनी कदम के तहत ‘सत्याग्रह’ का रास्ता अपनाने का ऐलान किया है।
न्यायिक प्रक्रिया को लेकर केजरीवाल का बड़ा फैसला
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा (Justice Swarna Kanta Sharma) को पत्र लिखकर कहा है कि वे अब इस मामले में न तो खुद अदालत में पेश होंगे और न ही उनके वकील जिरह करेंगे। इस कदम को उन्होंने “सत्याग्रह” का नाम दिया है। केजरीवाल ने कहा कि वह देश की न्याय प्रणाली का सम्मान करते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है। उन्होंने अपने बयान में इसे “बेहद संवेदनशील मामला” बताया।
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अंतरात्मा की आवाज पर लिया निर्णय
अपने चार पन्नों के पत्र में केजरीवाल ने लिखा कि यह फैसला उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर लिया है। उन्होंने माना कि इससे उनके कानूनी हित प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन वह इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस मामले में आगे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) का दरवाजा खटखटाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।
गांधी के सिद्धांतों का हवाला
केजरीवाल ने अपने पत्र में महात्मा गांधी के सत्याग्रह सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि उनका यह कदम केवल इस विशेष मामले तक सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि “न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए।”
सिसोदिया ने भी जताई आपत्ति
मनीष सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर साफ किया कि उनकी ओर से भी कोई वकील पेश नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा हालात में उन्हें निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं है और सत्याग्रह ही एकमात्र विकल्प बचा है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला दिल्ली के चर्चित आबकारी नीति केस से जुड़ा है। CBI (Central Bureau of Investigation) ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दिल्ली के उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में अपील दायर की है, जिसमें केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। 13 अप्रैल को केजरीवाल ने कोर्ट में पेश होकर जज से खुद को मामले से अलग करने की मांग की थी, जिसे 20 अप्रैल को खारिज कर दिया गया। अदालत ने कहा कि किसी भी राजनेता को न्यायपालिका पर अविश्वास फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
राजघाट पर श्रद्धांजलि और सत्याग्रह के ऐलान के साथ यह मामला अब राजनीतिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और न्यायिक प्रक्रिया पर इसका क्या असर पड़ता है।
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