
क्या है ‘योगी की पाती’?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नए शैक्षणिक सत्र के अवसर पर प्रदेश के बच्चों और अभिभावकों के नाम एक संदेश जारी किया है, जिसे ‘योगी की पाती’ का नाम दिया गया है। इस पत्र में मुख्यमंत्री ने न केवल बच्चों को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया है, बल्कि शिक्षा को संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का आधार बताया है।
मुख्यमंत्री के संदेश की 5 बड़ी बातें:
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शिक्षा ही सर्वोच्च प्राथमिकता: CM ने कहा कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा देना सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य है।
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श्रीराम और श्रीकृष्ण का उदाहरण: पत्र में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के ‘कर्मयोगी’ स्वरूप का जिक्र करते हुए शिक्षा को कर्तव्य पथ का हिस्सा बताया गया है।
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स्क्रीन टाइम नहीं, एक्टिविटी टाइम: मुख्यमंत्री ने आज के दौर में बच्चों को तकनीक के सही इस्तेमाल की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि फोन के ‘स्क्रीन टाइम’ को घटाकर खेल और योग के ‘एक्टिविटी टाइम’ को बढ़ाएं।
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स्कूल चलो अभियान 2026: 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
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अभिभावकों के लिए ‘संकल्प’: CM ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के साथ-साथ आस-पड़ोस के उन बच्चों को भी स्कूल पहुँचाने में मदद करें जो जानकारी के अभाव में शिक्षा से दूर हैं।
“विकसित उत्तर प्रदेश का लक्ष्य तभी पूर्ण होगा जब हर बच्चा पढ़ेगा, हर बच्चा बढ़ेगा।” — योगी आदित्यनाथ
सोशल मीडिया पर क्यों हो रहा है वायरल?
यह पत्र केवल एक सरकारी आदेश नहीं है, बल्कि इसमें CM योगी ने अपने विद्यार्थी जीवन की यादों को साझा किया है। उन्होंने लिखा कि विद्यालय केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि जीवन की मूल शिक्षा और संस्कारों की ‘प्रथम पाठशाला’ है।
BhaiyaJiGazab Opinion: मुख्यमंत्री का यह अंदाज़ बच्चों के साथ सीधा जुड़ाव पैदा कर रहा है। शिक्षा के प्रति इस तरह की जागरूकता निश्चित रूप से यूपी के भविष्य को सुनहारा बनाएगी।




