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लाशों के बदले लाशें! रूस ने यूक्रेन को लौटाया 1,000 सैनिकों का गौरव, युद्ध के बीच पिघल रही पुतिन की बर्फ?

लाशों के बदले लाशें! रूस ने यूक्रेन को लौटाया 1,000 सैनिकों का गौरव

रूस और यूक्रेन के बीच जारी खूनी संघर्ष के बीच गुरुवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने युद्ध की विभीषिका और मानवीय संवेदनाओं को एक साथ झकझोर कर रख दिया। दोनों देशों के बीच युद्ध में मारे गए सैनिकों के शवों का एक बड़ा आदान-प्रदान हुआ है। इस विनिमय में रूस ने यूक्रेन को 1,000 सैनिकों के पार्थिव शरीर सौंपे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम को युद्ध के बीच की एक महत्वपूर्ण मानवीय पहल माना जा रहा है। भले ही मोर्चे पर गोलियों की गूँज कम नहीं हुई है, लेकिन अपने वीर जवानों को अंतिम विदाई देने के लिए दोनों देशों ने एक बार फिर सहयोग का रास्ता अपनाया है।

ताबूतों की लंबी कतार

यूक्रेन की राजधानी कीव में युद्ध बंदियों और शहीदों के मामलों को संभालने वाले केंद्र (POW Coordination Center) ने टेलीग्राम ऐप के जरिए इस खबर की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने गुरुवार को 1,000 ऐसे शव सौंपे हैं, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे यूक्रेनी सेना के जवान हैं। यह आंकड़ा हाल के महीनों में हुए सबसे बड़े विनिमय में से एक है। 1,000 परिवारों के लिए यह खबर एक गहरे दुख के साथ-साथ राहत भी लेकर आई है, क्योंकि अब वे अपने बेटों और पिताओं का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कर सकेंगे। रूस की ओर से इतनी बड़ी संख्या में शवों का सौंपा जाना यह भी दर्शाता है कि युद्ध के मैदान में हताहतों की संख्या कितनी भयावह हो सकती है।

रूस को मिले 41 जवान

दूसरी ओर, यूक्रेन ने भी रूसी सेना के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए 41 रूसी सैनिकों के शव मॉस्को को हस्तांतरित किए हैं। रूस के प्रतिष्ठित समाचार आउटलेट ‘आरबीसी’ (RBC) ने रूसी सांसद शमशाल सरलीयेव के हवाले से इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। सरलीयेव ने पुष्टि की कि यूक्रेन ने विनिमय प्रक्रिया के तहत 41 मृत रूसी सैनिकों को सौंपा है। हालांकि, संख्या के लिहाज से यह विनिमय काफी असंतुलित दिखता है, लेकिन कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में संख्या से ज्यादा उस प्रक्रिया का महत्व है जो दुश्मनी के बीच भी संवाद के रास्ते खोले रखती है।

खूनी संघर्ष के बीच ‘इंसानियत’ का आखिरी पुल

रूस और यूक्रेन के बीच यह कोई पहली घटना नहीं है। युद्ध की शुरुआत से ही दोनों पक्ष समय-समय पर अपने मृत सैनिकों का आदान-प्रदान करते रहे हैं। समाचार एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के मोर्चे पर चल रही रणनीतिक खींचतान के बावजूद, शवों के इस हस्तांतरण को एक रूटीन लेकिन अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया माना जाता है। इस विनिमय का उद्देश्य युद्ध के नियमों (Rules of War) के तहत सैनिकों को उनके वतन की मिट्टी नसीब कराना है। फिलहाल, इन शवों की पहचान और डीएनए जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि उन्हें उनके सही उत्तराधिकारियों को सौंपा जा सके। यह घटना याद दिलाती है कि युद्ध की हर जीत और हार के पीछे केवल आंकड़े नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगियां और टूटे हुए परिवार होते हैं।

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