भोपाल बना देश का पहला शहर जहाँ लगाया गया “Algae Tree” | 25 पेड़ों जितनी ऑक्सीजन देने का दावा
भोपाल के स्वामी विवेकानंद पार्क में लगाया गया देश का पहला Algae Tree, जो CO₂ सोखकर हवा को साफ करने का दावा करता है, जानें पूरी जानकारी।
भोपाल | पर्यावरण तकनीक में बड़ी पहल
Bhopal ने एक बार फिर देश में सुर्खियां बटोरी हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी के अशोका गार्डन स्थित स्वामी विवेकानंद पार्क में देश का पहला आधुनिक “Algae Tree” स्थापित किया गया है। यह प्रोजेक्ट शहर में प्रदूषण कम करने और हवा को शुद्ध करने की दिशा में एक नई तकनीकी पहल माना जा रहा है।
क्या है Algae Tree?
“Algae Tree” कोई प्राकृतिक पेड़ नहीं, बल्कि एक हाई-टेक एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम है जिसमें माइक्रोएल्गी (सूक्ष्म शैवाल) का उपयोग किया जाता है। यह सिस्टम वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को सोखकर ऑक्सीजन (O₂) छोड़ता है, जिससे हवा को शुद्ध करने में मदद मिलती है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
इस तकनीक का कार्य सिद्धांत बेहद आधुनिक है:
- आसपास की हवा को मशीन के अंदर खींचा जाता है
- माइक्रोएल्गी CO₂ को अवशोषित करते हैं
- सूर्य के प्रकाश से प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया होती है
- इसके परिणामस्वरूप ऑक्सीजन बाहर निकलती है
- साथ ही हवा में मौजूद प्रदूषक कणों को भी कम करने में मदद मिलती है
25 पेड़ों जितनी क्षमता का दावा
रिपोर्ट्स के अनुसार:
- एक Algae Tree लगभग 25 पेड़ों के बराबर ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता रखता है
- यह हर साल करीब 1.5 टन CO₂ को अवशोषित कर सकता है
- कम जगह में भी इसे स्थापित किया जा सकता है
👉 इसी कारण इसे शहरी क्षेत्रों के लिए एक प्रभावी “ग्रीन टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन” माना जा रहा है।
कहां लगाया गया है यह प्रोजेक्ट?
- स्थान: स्वामी विवेकानंद पार्क
- क्षेत्र: अशोका गार्डन, भोपाल
- पहल: स्मार्ट सिटी मिशन के तहत
यह प्रोजेक्ट भोपाल को स्मार्ट और पर्यावरण-अनुकूल शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्यों खास है यह तकनीक?
विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक की खासियतें हैं:
- सीमित जगह में अधिक प्रभाव
- शहरी प्रदूषण नियंत्रण में मदद
- आधुनिक ग्रीन टेक्नोलॉजी का उदाहरण
- भविष्य के स्मार्ट शहरों के लिए मॉडल
विशेषज्ञों की राय
हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि:
- यह तकनीक उपयोगी है, लेकिन
- असली पेड़ों का विकल्प नहीं है
पेड़ प्राकृतिक रूप से मिट्टी संरक्षण, छाया, और जैव विविधता बनाए रखते हैं, जो मशीनें पूरी तरह नहीं कर सकतीं।
निष्कर्ष
भोपाल का यह “Algae Tree” भारत में पर्यावरण संरक्षण और तकनीक के संगम का एक नया उदाहरण है। यह पहल भविष्य में शहरी प्रदूषण से निपटने के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।




