
नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupra) की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि उन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की बजाय दिल्ली पुलिस ही सुरक्षा मुहैया कराएगी।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के लिए Z-श्रेणी सुरक्षा की मांग को लेकर प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें CRPF की तैनाती की संभावना जताई गई थी। हालांकि, गृह मंत्रालय की समीक्षा बैठक के बाद यह तय हुआ कि फिलहाल उनकी सुरक्षा दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई संभालेगी।
बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस की सुरक्षा विंग पहले से ही मुख्यमंत्री के आवास और यात्रा मार्ग पर विशेष व्यवस्था कर रही है। सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जवान और अत्याधुनिक उपकरण भी तैनात किए जाएंगे।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर पिछले हफ़्ते हुए हमले के पीछे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, राजेश सकरिया नामक व्यक्ति ने उन पर चाकू से हमला करने की योजना बनाई थी।
गुजरात के राजकोट निवासी 41 वर्षीय राजेश सकरिया को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि उसने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री पर हमला इसलिए किया क्योंकि उसकी अपील—दिल्ली से आवारा कुत्तों को न हटाए जाने—को रेखा गुप्ता ने कथित रूप से नज़रअंदाज़ कर दिया था।
हमले की घटना के बाद केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री को अस्थायी तौर पर जेड श्रेणी की सीआरपीएफ सुरक्षा मुहैया कराई थी। लेकिन आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक अब यह सुरक्षा वापस ले ली गई है। उनकी सुरक्षा का जिम्मा एक बार फिर दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया है।
सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई को सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के आवास और जनसभाओं में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि सीआरपीएफ सुरक्षा बढ़ाने का आदेश केंद्र द्वारा औपचारिक रूप से जारी किया जाना था, लेकिन अंतिम समय में इसे बदल दिया गया और सुरक्षा वापस लेने के आदेश जारी किए गए।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी राजेशभाई खिमजी सकारिया भी शामिल है। 41 वर्षीय सकारिया पेशे से ऑटो चालक है और गुजरात के राजकोट का निवासी है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हाल ही में एक जनसुनवाई के दौरान हमला किया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह हमला आवारा कुत्तों को हटाने से जुड़ी शिकायत को लेकर आरोपी की नाराज़गी के चलते हुआ।
राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा है कि CRPF की जगह दिल्ली पुलिस को जिम्मेदारी सौंपे जाने के पीछे केंद्र और राज्य के बीच तालमेल और सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकताओं का संतुलन एक अहम वजह माना जा रहा है।




