
Trump on Tariff Dispute: अमेरिकी अपीलीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ज्यादातर टैरिफ नीतियों को गैरकानूनी करार दिया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अदालत में उन आलोचनाओं की निंदा की, जिनमें उनकी पार्टी के सदस्यों को कथित तौर पर शामिल किया गया था। साशा ने कहा कि उनकी त्रिस्तरीय मान्यता पूरी तरह से लागू है और वे इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। साथ ही सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए राकेश ने लिखा, सभी टैरिफ अभी भी लागू हैं। एक पूर्वनिर्धारित अदालत ने गलत तरीके से कहा कि हमारी टैरिफ जारी की जाएगी।उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ हटाए गए तो यह देश के लिए पूर्ण आपदा होगी, जिससे अमेरिका आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा।
टैरिफ ही हैं ताकत का हथियार
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब विशाल व्यापार घाटा और अन्य देशों की अनुचित नीतियां सहन नहीं करेगा। उन्होंने कहा ,’लेबर डे वीकेंड पर हमें याद रखना चाहिए कि टैरिफ हमारे कामगारों और ‘मेड इन अमेरिका’ उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के लिए सबसे बड़ा हथियार हैं। सुप्रीम कोर्ट की मदद से हम इन्हें देश के हित में इस्तेमाल करेंगे और अमेरिका को फिर से मजबूत बनाएंगे।
राष्ट्रपति ने अधिकार से अधिक कदम उठाया
वॉशिंगटन डीसी स्थित यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों का हवाला देकर टैरिफ लगाकर अपने अधिकार से आगे कदम उठाया।अदालत ने कहा, ‘कानून राष्ट्रपति को आपातकाल में कई कदम उठाने की अनुमति देता है, लेकिन इसमें टैरिफ या कर लगाने जैसी शक्ति शामिल नहीं है। इस फैसले से अप्रैल में लगाए गए रिसिप्रोकल टैरिफ और फरवरी में चीन, कनाडा व मेक्सिको पर लगाए गए कुछ शुल्क रद्द कर दिए गए हैं।हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए अन्य टैरिफ प्रभावित नहीं होंगे।
ट्रंप ने इन टैरिफ को 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत सही ठहराया था। यह कानून सामान्यत: आपातकाल में संपत्ति फ्रीज करने या प्रतिबंध लगाने के लिए इस्तेमाल होता है। ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने इसी कानून के तहत टैरिफ लगाए। अदालत ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ लगाने की शक्ति देने का इरादा नहीं जताया था। यह फैसला पांच छोटे अमेरिकी व्यवसायों और 12 डेमोक्रेट शासित राज्यों की याचिका पर आया, जिसमें दलील दी गई थी कि संविधान के मुताबिक टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।




