Women and Men in India 2025 Report: MoSPI की नवीनतम ‘भारत में महिला और पुरुष 2025’ रिपोर्ट ने देश में लैंगिक असमानता और महिलाओं की बदलती भूमिका पर एक जरुरी डेटा शेयर किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय महिलाएं शिक्षा और करियर में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, लेकिन साथ ही घरेलू जिम्मेदारियों का बोझ भी उठा रही है.
महिलाओं पर तीन गुना बोझ
रिपोर्ट के मुताबिक, एक भारतीय महिला घर के बिना वेतन वाले कामों (जैसे चूल्हा-चौका और देखभाल) में प्रतिदिन औसतन 289 मिनट खर्च करती है। वही, पुरुष इन कामों में केवल 88 मिनट ही देते हैं। खास बात यह है कि साल 2019 से 2024 के बीच पुरुषों द्वारा घर के कामों में बिताए जाने वाले समय में मामूली बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन यह महिलाओं के मुकाबले अब भी काफी कम है।
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शिक्षा और करियर में शानदार प्रदर्शन
इन आंकड़ों से साफ़ हैं कि देश की बेटियां अब बेटों को पीछे छोड़ रही हैं, बता दें उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन अनुपात (GER) 30.2% पर पहुंच गया है, जो पुरुषों के 28.9% से अधिक है। ऑफिस में मैनेजर और ऊंचे पदों पर महिलाओं की संख्या में 102.54% का जबरदस्त उछाल आया है। प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक देश ने लैंगिक समानता हासिल कर ली है।
ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी
श्रम बल भागीदारी दर में भी सुधार हुआ है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी 37.5% (2022) से बढ़कर 45.9% (2025) हो गई है। हालांकि, 15 वर्ष से अधिक आयु के कार्यबल जनसंख्या अनुपात में अभी भी बड़ा अंतर है, जहां पुरुषों का अनुपात 76.6% है, वहीं महिलाओं का 38.8% है।
सुधरता लिंग अनुपात
सामाजिक मोर्चे पर एक बड़ी राहत की खबर यह है कि जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार हुआ है। यह 904 (2017-19) से बढ़कर अब 917 (2021-23) हो गया है, जो समाज की बदलती सोच को दर्शाता है।




