AAP से BJP में गए 7 सांसदों पर भगवंत मान का तंज, बोले—‘मसाले मिलकर स्वाद बढ़ाते हैं, खुद की पहचान नहीं बनातें’
AAP के 7 राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने पर पंजाब के सीएम भगवंत मान ने तीखा तंज कसा। राघव चड्ढा समेत नेताओं पर निशाना, जानें पूरा मामला।

आम आदमी पार्टी (AAP) को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब उसके सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़कर BJP का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर संकट की स्थिति पैदा कर दी है। शुक्रवार (24 अप्रैल 2026) को लिए गए इस फैसले के बाद सियासत तेज हो गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
भगवंत मान का तीखा तंज
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इन नेताओं पर व्यंग्य किया।
उन्होंने लिखा कि अदरक, लहसुन, जीरा, मेथी, काली मिर्च, लाल मिर्च और धनिया—ये 7 चीज़ें मिलकर किसी भी सब्जी का स्वाद बढ़ा सकते हैं, लेकिन ये खुद अपने दम पर कोई “सब्ज़ी” नहीं बन सकते। उनके इस बयान को सीधे तौर पर पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर तंज माना जा रहा है।
https://x.com/BhagwantMann/status/2047886178855399791?s=20
किन नेताओं ने छोड़ा AAP का साथ?
AAP से इस्तीफा देने वालों में राघव चड्ढा (Raghav Chadha), अशोक मित्तल (Ashok Mittal), संदीप पाठक (Sandeep Pathak) के अलावा स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal), हरभजन सिंह (Harbhajan Singh), राजिंदर गुप्ता (Rajinder Gupta) और विक्रम साहनी (Vikram Sahney) शामिल हैं। इन सभी नेताओं के BJP में जाने से पार्टी की राज्यसभा में स्थिति कमजोर हुई है।
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‘गद्दार’ कहकर साधा निशाना
भगवंत मान ने इससे पहले भी इन नेताओं को लेकर कड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा कि ये सांसद पंजाब का प्रतिनिधित्व नहीं करते और जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने BJP पर भी आरोप लगाया कि वह राजनीतिक फायदे के लिए इस तरह की रणनीतियां अपना रही है।
BJP पर लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब में AAP सरकार के काम से BJP घबराई हुई है, इसलिए इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब की जनता विश्वासघात को कभी नहीं भूलती और ऐसे नेताओं को समय आने पर जवाब जरूर मिलेगा।
आगे क्या होगा?
AAP के लिए यह घटनाक्रम बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। राज्यसभा में पार्टी की ताकत घटने के साथ-साथ संगठनात्मक स्तर पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, BJP इस बदलाव को अपने पक्ष में बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रही है।




