
नई दिल्ली। उप राष्ट्रपति के नाम पर आम स चुनाव !हमति बनने के आसार कम हैं। हालांकि विपक्षी पार्टियों ने अभी खुल कर कुछ नहीं कहा है लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि विपक्षी गठबंधन की पार्टियों ने भी चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि विपक्षी पार्टियां एक साथ मिल कर रणनीति तय करेंगी। गौरतलब है कि भारत में उप राष्ट्रपति पद के लिए आमतौर पर चुनाव होता है। जिसकी सरकार रहती है वह आम सहमति बनाने का प्रयास करने की बात करता है लेकिन उसको कामयाबी नहीं मिलती है।
पिछली बार यानी 2022 के चुनाव में भी कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने मारग्रेट अल्वा को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि उनको इलेक्टोरल कॉलेज का महज 25.63 फीसदी ही वोट मिल पाया था और 74 फीसदी से ज्यादा वोट लेकर जगदीप धनखड़ जीते थे। उससे पहले 2017 में विपक्ष ने भाजपा के उम्मीदवार वेंकैया नायडू के खिलाफ महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी को उम्मीदवार बनाया था। उनको 32.11 फीसदी वोट मिले थे।
उससे पहले जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी तो हामिद अंसारी के मुकाबले भाजपा ने जसवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया था। तब जसवंत सिंह को 32.69 फीसदी वोट मिले थे। हामिद अंसारी लगातार दूसरी बार उप राष्ट्रपति चुने गए। उससे पहले 2007 में हामिद अंसारी के खिलाफ भाजपा ने नजमा हेपतुल्ला को उतारा था और तब समाजवादी पार्टी ने एक तीसरा मोर्चा बना कर राशिद मसूद को उम्मीदवार बना दिया था। सो, इस बार भी उप राष्ट्रपति का चुनाव होगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला ‘इंडिया’ ब्लॉक एकजुट रहता है या नहीं।
पिछले कुछ दिनों से विपक्षी गठबंधन में बिखराव दिख रहा है। अरविंद केजरीवल के नेतृच्व वाले आम आदमी पार्टी ने गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है। ममता बनर्जी भी अपने राज्य के चुनाव के हिसाब से उप राष्ट्रपति के बारे में फैसला करेंगी। कांग्रेस पर भी दबाव होगा कि वह दक्षिण या पूर्वी भारत के चुनावों के हिसाब से उम्मीदवार तय करे। भाजपा भी उम्मीदवार इस हिसाब से तय करेगी, जिससे विपक्षी गठबंधन में फूट पड़े।

