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क्या ब्रिटेन लौटाएगा कोहिनूर हीरा? ममदानी बोले- 'भारत को कोहिनूर वापस कर दें'

न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी ने कोहिनूर हीरे को भारत वापस करने की मांग उठाई। जानें इस ऐतिहासिक रत्न के विवाद, इतिहास और वैश्विक बहस की पूरी कहानी।

क्या भारत लौटेगा कोहिनूर ? अमेरिकी मेयर ने उठाई ऐतिहासिक मांग

दुनिया के सबसे चर्चित और विवादित रत्नों में शामिल कोहिनूर हीरा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सांस्कृतिक विरासत की बहस के केंद्र में आ गया है। हाल ही में न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने इस ऐतिहासिक हीरे को भारत को वापस सौंपने की खुलकर वकालत की है। उनका यह बयान उस समय सामने आया जब वे 11 सितंबर के हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम से पहले मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

क्या है पूरा मामला?

मेयर ममदानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि कोहिनूर केवल एक रत्न नहीं, बल्कि इतिहास, पहचान और न्याय का प्रतीक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उपनिवेशकाल के दौरान जिन वस्तुओं को जबरन या विवादित परिस्थितियों में लिया गया, उन्हें उनके मूल देश को लौटाना नैतिक जिम्मेदारी है।

ममदानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस दौरान कहा कि वह ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय को ऐतिहासिक कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। उनका कहना है, कि ये मुद्दा आधिकारिक एजेंडा का हिस्सा नहीं था, लेकिन उन्हें अगर निजी तौर पर मिलने का मौका दिया जाएं तो वह इसे जरूर उठाएंगे।

आगे उन्होंने कहा कि अगर मुझे राजा से अलग से बात करनी होती तो मैं शायद उन्हें कोहिनूर हीरा लौटाने के लिए प्रोत्साहित करता।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ममदानी ने 9/11 स्मारक कार्यक्रम में किंग चार्ल्स से मुलाकात भी की। इस दौरान दोनों के बीच कुछ बातचीत भी हुई, लेकिन ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि उस चर्चा में कोहिनूर के विषय में बात हुई या नहीं। बता दें कि इन दिनों किंग चार्ल्स अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जहां विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।

उनके इस बयान ने वैश्विक स्तर पर एक नई बहस को जन्म दिया है, जिसमें सांस्कृतिक विरासत की वापसी और औपनिवेशिक इतिहास की समीक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।

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कोहिनूर हीरे का इतिहास

कोहिनूर हीरा भारत के इतिहास का एक अहम हिस्सा रहा है। माना जाता है कि यह हीरा 13वीं शताब्दी में भारत की खानों से निकला था और कई राजवंशों के हाथों से गुजरते हुए अंततः ब्रिटिश शासन के दौरान इंग्लैंड पहुंच गया। आज यह हीरा ब्रिटेन के शाही ताज का हिस्सा है और टॉवर ऑफ लंदन में प्रदर्शित किया जाता है। इस बेशकीमती हीरे को महारानी एलिजाबेथ द क्वीन के मुकुट पर भी सजाया गया था। भारत लंबे समय से इस हीरे की वापसी की मांग करता रहा है, लेकिन ब्रिटेन ने अब तक इसे लौटाने से इनकार किया है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में औपनिवेशिक दौर में लूटे गए कलाकृतियों और धरोहरों को वापस करने की मांग तेज हुई है। कई देशों ने अपने ऐतिहासिक खजाने वापस पाने के लिए कूटनीतिक और कानूनी प्रयास शुरू किए हैं।

मेयर ममदानी का बयान इस वैश्विक आंदोलन को और मजबूती देता नजर आ रहा है। उनका कहना है कि यह सिर्फ भारत का मुद्दा नहीं, बल्कि न्याय और इतिहास के सही मूल्यांकन का सवाल है।

भारत का रुख

भारत सरकार कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कोहिनूर की वापसी की मांग उठा चुकी है। भारत का तर्क है कि यह हीरा देश की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का हिस्सा है, जिसे औपनिवेशिक काल में अनुचित तरीके से ले जाया गया। हालांकि, ब्रिटेन इस दावे को कानूनी रूप से खारिज करता रहा है और कहता है कि हीरा वैध समझौते के तहत प्राप्त किया गया था।

राजनीतिक और नैतिक बहस

इस मुद्दे पर राजनीतिक और नैतिक दोनों तरह की बहस जारी है। एक ओर जहां कुछ लोग इसे ऐतिहासिक न्याय का मामला मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतने पुराने मामलों को आज के समय में सुलझाना जटिल है। फिर भी, ममदानी जैसे नेताओं के बयान यह संकेत देते हैं कि भविष्य में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है।

कोहिनूर हीरे की वापसी को लेकर उठी यह नई आवाज न केवल भारत-ब्रिटेन संबंधों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक संपत्ति के अधिकारों पर भी गहरी बहस छेड़ सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठता है या यह बहस केवल बयानबाजी तक ही सीमित रह जाती है।

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