मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: देश में 850 होंगी फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें, रेप और POCSO मामलों की होगी तेज सुनवाई
नई दिल्ली: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (Fast Track Special Courts) योजना को आगे जारी रखने और मजबूत बनाने की मंजूरी दे दी गई है।
इस फैसले के बाद देश में फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की संख्या मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 की जाएगी। इन अदालतों का मुख्य उद्देश्य दुष्कर्म और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना है। सरकार के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
850 फास्ट ट्रैक अदालतों के लिए ₹3,788 करोड़ खर्च करेगी सरकार
केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना के लिए कुल 3,788.04 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दी है। इस राशि में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 2,353.15 करोड़ रुपये होगी, जबकि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से 1,434.89 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
केंद्र सरकार की हिस्सेदारी निर्भया फंड से उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना को अगले पांच साल यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखा जाएगा।
किन मामलों की होगी फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई?
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट का मुख्य फोकस दो तरह के गंभीर मामलों पर रहेगा।
- महिलाओं से जुड़े दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई।
- बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े POCSO मामलों का निपटारा।
इनमें विशेष POCSO अदालतें भी शामिल होंगी। इन अदालतों का उद्देश्य ऐसे मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया को तेज करना और लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता देना है।
हर अदालत में होंगे जज, सरकारी वकील और 6 कर्मचारी
सरकार की योजना के तहत प्रत्येक फास्ट ट्रैक विशेष अदालत में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष सरकारी वकील (Special Public Prosecutor) और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था होगी।
इससे अदालतों में मामलों की सुनवाई और प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अब तक 4 लाख से ज्यादा मामलों का हो चुका है निपटारा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 4.02 लाख से अधिक दुष्कर्म और POCSO से जुड़े मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
अब अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे उन जिलों को भी योजना के दायरे में लाने में मदद मिलेगी जहां दुष्कर्म और POCSO से जुड़े मामलों का लंबित बोझ अधिक है।
पीड़ितों के लिए भी होंगी विशेष सुविधाएं
इस योजना में केवल मामलों का जल्द निपटारा करना ही नहीं, बल्कि पीड़ितों के लिए सुरक्षित और संवेदनशील न्यायिक माहौल तैयार करना भी शामिल है।
इसके तहत कमजोर गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए विशेष केंद्र और बच्चों के अनुकूल अदालतों की सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित और गवाह बिना अनावश्यक मानसिक दबाव के अपनी बात रख सकें।
29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है योजना
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना अक्टूबर 2019 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य दुष्कर्म और POCSO अधिनियम 2012 के तहत दर्ज मामलों की समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करना है।
यह योजना 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। अब सरकार ने इसे मार्च 2031 तक जारी रखने का फैसला किया है।
क्या होगा सरकार के इस फैसले का फायदा?
850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें संचालित होने से दुष्कर्म और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने में मदद मिल सकती है। इससे लंबित मामलों का बोझ कम करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया मजबूत होने की उम्मीद है।
हालांकि, अदालतों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ न्यायिक अधिकारियों की उपलब्धता, प्रभावी जांच और समय पर सुनवाई सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, मोदी कैबिनेट का यह फैसला महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना होगा कि 850 अदालतों के विस्तार से देश में लंबित मामलों के निपटारे की रफ्तार कितनी बढ़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. मोदी कैबिनेट ने फास्ट ट्रैक अदालतों की संख्या कितनी करने की मंजूरी दी है?
सरकार ने फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 करने की मंजूरी दी है।
Q2. फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए कितने रुपये मंजूर हुए हैं?
इस योजना के लिए कुल 3,788.04 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
Q3. फास्ट ट्रैक कोर्ट में किन मामलों की सुनवाई होगी?
इन अदालतों में दुष्कर्म और POCSO अधिनियम के तहत बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी।
Q4. फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना कब तक जारी रहेगी?
इस योजना को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है।
Q5. फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना कब शुरू हुई थी?
यह योजना अक्टूबर 2019 में शुरू की गई थी।




